
शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन चार दशक से भी अधिक समय तक चला। इस दौरान उन्होंने आंदोलनकारी, संगठनकर्ता, सांसद और मुख्यमंत्री जैसी कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
वह झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री बने। पहली बार वर्ष 2005 में, दूसरी बार 2008 में और तीसरी बार 2009-2010 के दौरान उन्होंने राज्य की कमान संभाली। हालांकि गठबंधन सरकार होने के कारण उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चल सका।
शिबू सोरेन दुमका से आठ बार लोकसभा सांसद चुने गए। इसके अलावा वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे। केंद्र सरकार में उन्हें तीन अलग-अलग कार्यकाल में कोयला मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली।
जनसभाओं से लेकर संसद तक उनकी पहचान एक मजबूत और बेबाक आदिवासी नेता के रूप में रही। उन्होंने हमेशा आदिवासी समाज और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए खुलकर आवाज उठाई और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया।
