
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है। खरगे ने सदन में आरोप लगाया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में उनकी रैली के बाद उस जगह का ‘शुद्धिकरण’ किया गया। उन्होंने इसे अपने दलित होने से जोड़ते हुए सवाल उठाया। अब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई है।
खरगे ने सदन में क्या कहा?
मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान से जुड़ा है, जहां खरगे ने कुछ दिन पहले एक राजनीतिक कार्यक्रम को संबोधित किया था। इसके बाद वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण की रस्म किए जाने की बात सामने आई।
खरगे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उनके दलित होने के कारण ऐसा किया गया। इस आरोप के बाद राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर बहस शुरू हो गई है।
चिराग पासवान ने क्या कहा?
गुरुवार को संसद के बाहर पत्रकारों ने जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से इस मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि वास्तव में ऐसी घटना हुई थी या नहीं।
हालांकि, चिराग ने यह भी कहा कि अगर खरगे जैसे वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने इस मामले को लेकर चिंता जाहिर की है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना वास्तव में हुई है तो उत्तराखंड सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।
‘आज भी भेदभाव के उदाहरण सामने आते हैं’
चिराग पासवान ने इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने देश में दलितों के साथ भेदभाव की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज भी ऐसे उदाहरण सामने आते हैं, जहां जाति के आधार पर लोगों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है।
उन्होंने घोड़ी चढ़ने से रोकने, बारात निकालने में बाधा और मंदिर में प्रवेश के बाद मंदिर को धुलवाने जैसी घटनाओं का उल्लेख किया। चिराग ने कहा कि अगर हल्द्वानी में भी इसी तरह की घटना हुई है तो इसकी जांच जरूरी है।
LJP सांसद ने भी कार्रवाई की मांग की
इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर खरगे का अपमान दलित होने के कारण किया गया है तो ऐसा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
विवाद के पीछे क्या है मामला?
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की सभा के बाद वहां ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम किए जाने की खबर सामने आई। इस घटना को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए हैं, जबकि दूसरी ओर इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच की मांग भी उठ रही है।
फिलहाल इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या वास्तव में खरगे की सभा के बाद उनके दलित होने के कारण उस स्थान का शुद्धिकरण कराया गया था? चिराग पासवान ने भी इसी बिंदु पर जांच की जरूरत बताई है।
राजनीतिक विवाद अब जांच की मांग तक पहुंचा
खरगे के आरोप के बाद शुरू हुई राजनीतिक बहस में अब NDA के नेता भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। चिराग पासवान का रुख सीधे तौर पर आरोप की पुष्टि करने का नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा है कि अगर घटना हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
