
दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने CBI की उस याचिका को खारिज करने की मांग की है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के डिस्चार्ज आदेश को चुनौती दी है।
मामला उस समय फिर चर्चा में आया है, जब CBI की अपील दाखिल करने की प्रक्रिया को लेकर केजरीवाल ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रायल कोर्ट का लंबा आदेश आने के महज कुछ घंटों के भीतर CBI ने हाईकोर्ट में चुनौती दे दी।
500 से ज्यादा पन्नों के आदेश पर उठाया सवाल
केजरीवाल की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने मामले में विस्तृत आदेश दिया था। इसमें बड़ी मात्रा में दस्तावेजों और सबूतों पर विचार किया गया था। इसके बावजूद CBI ने आदेश के कुछ ही घंटे बाद अपनी याचिका दाखिल कर दी।
कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रायल कोर्ट का आदेश 27 फरवरी 2026 को आया था और केजरीवाल ने यह तर्क दिया कि इसके करीब चार घंटे के भीतर CBI ने रिवीजन याचिका दाखिल कर दी। केजरीवाल ने सवाल किया कि इतने बड़े आदेश और रिकॉर्ड का इतनी कम अवधि में पूरी तरह अध्ययन कैसे किया जा सकता है।
CBI ने क्यों दी ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती?
दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने फरवरी में आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था। अदालत ने माना था कि CBI की ओर से लगाए गए आरोपों को आगे मुकदमा चलाने के स्तर पर पर्याप्त सामग्री का समर्थन नहीं करती। इसके बाद CBI ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी।
CBI का कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री और मामले के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया। जांच एजेंसी का दावा है कि आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद हैं।
केजरीवाल ने CBI की याचिका को बताया चुनौती योग्य
केजरीवाल की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया है कि CBI की याचिका में ट्रायल कोर्ट के आदेश के हर महत्वपूर्ण निष्कर्ष को अलग-अलग तरीके से चुनौती नहीं दी गई है। उनका तर्क है कि इतने बड़े आदेश के खिलाफ सामान्य तरीके से दाखिल की गई याचिका पर आगे सुनवाई नहीं होनी चाहिए।
केजरीवाल ने हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई को लेकर अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। उनका कहना है कि पहले के कुछ आदेशों और मौजूदा कार्यवाही को देखते हुए उन्हें निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका है।
मामला अभी खत्म नहीं हुआ
ट्रायल कोर्ट से डिस्चार्ज होने के बाद भी आबकारी नीति से जुड़ा कानूनी विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। CBI की चुनौती दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है और अब केजरीवाल व सिसोदिया ने CBI की याचिका को खारिज करने की मांग की है।
यानी फिलहाल मामला एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। ट्रायल कोर्ट के आदेश के बाद जहां केजरीवाल और अन्य आरोपियों को राहत मिली थी, वहीं CBI की चुनौती के कारण हाईकोर्ट में इस फैसले की दोबारा कानूनी समीक्षा हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली की 2021-22 आबकारी नीति को लेकर CBI और ED ने अलग-अलग जांच की थी। जांच एजेंसियों ने नीति में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है।
अब दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई यह तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी कि CBI की चुनौती पर आगे किस तरह कार्यवाही होगी।
