
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले ने करीब दो साल पुरानी घटना की याद ताजा कर दी है। दिसंबर 2024 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर उन पर गोली चलाने की कोशिश हुई थी। उस वक्त भी वह बाल-बाल बच गए थे। अब नांदेड़ में एक व्यक्ति ने उन पर कृपाण से हमला करने की कोशिश की, जिसमें उनके हाथ में चोट आई है।
2024 में स्वर्ण मंदिर के बाहर चली थी गोली
4 दिसंबर 2024 को सुखबीर बादल स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर धार्मिक सजा के तहत सेवादार की भूमिका निभा रहे थे। इसी दौरान एक हमलावर उनके पास पहुंचा और गोली चला दी।
सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी ने समय रहते हमलावर का हाथ पकड़ लिया। गोली बादल को नहीं लगी और पीछे की दीवार में जा लगी। हमलावर को मौके पर ही काबू कर लिया गया था।
यानी उस हमले में दूरी बेहद कम थी और एक छोटी-सी चूक बड़ा हादसा कर सकती थी।
अब नांदेड़ में कृपाण से हमला
अब 13 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के नांदेड़ में सुखबीर बादल पर हमला हुआ। वह तख्त श्री हजूर साहिब के परिसर में मौजूद थे, तभी एक व्यक्ति ने कृपाण से उन पर वार करने की कोशिश की।
सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और हमलावर को पकड़ लिया। हमले के दौरान बादल के हाथ में चोट लगी। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। घटना को रोकने की कोशिश में एक पुलिसकर्मी के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है।
दो घटनाएं, सवाल एक—सुरक्षा कितनी मजबूत?
सुखबीर बादल के साथ दो अलग-अलग मौकों पर धार्मिक स्थलों पर हमले की कोशिश हुई। पहली घटना में गोली चली, लेकिन वह बच गए। दूसरी घटना में कृपाण से हमला किया गया और इस बार भी सुरक्षाकर्मियों की तेजी से बड़ा नुकसान टल गया।
नांदेड़ की घटना के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं और बादल से फोन पर बात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली।
हमलावर हिरासत में, वजह की जांच जारी
नांदेड़ में हमले के आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि उसने हमला क्यों किया और क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी।
फिलहाल पुलिस की जांच पूरी होने से पहले हमले की वजह को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पहले भी बाल-बाल बचे, अब फिर टला बड़ा हादसा
दोनों घटनाओं को साथ रखकर देखें तो सुखबीर बादल के लिए यह महज एक और सुरक्षा घटना नहीं है। दिसंबर 2024 में गोली और अगस्त 2026 में कृपाण—दोनों बार हमला बेहद करीब से हुआ, लेकिन दोनों बार वह बच गए।
अब नांदेड़ की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई-प्रोफाइल राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी घटनाएं दोबारा क्यों हो रही हैं और इस हमले की पूरी सच्चाई जांच में क्या सामने आती है।
