

रांची। पूरे राज्य में आज झारखंड स्थापना दिवस (15 नवंबर) उत्साह और गौरव के साथ मनाया जा रहा है। इस बार का अवसर खास है—क्योंकि राज्य अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है। राजधानी रांची का मोराबादी मैदान आज सांस्कृतिक रंगों, झारखंडी परंपराओं और हजारों लोगों की भीड़ से एक उत्सव स्थल में बदल गया।
मोराबादी में भव्य राज्य स्तरीय समारोह
राज्य सरकार की ओर से मोराबादी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में झारखंड की लोक संस्कृति, आदिवासी परंपराएँ, कला, संगीत और नृत्य की अद्भुत झलक देखने को मिली। हजारीबाग के कलाकारों द्वारा बनाई गई पारंपरिक सोहराय पेंटिंग स्टेज की खास आकर्षण बनी रही।
सरकारी विभागों ने 25 वर्षों की उपलब्धियों को साझा किया, वहीं विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों और सामाजिक बदलावों की प्रदर्शनी भी लगाई गई।
बिरसा मुंडा जयंती का डबल सेलिब्रेशन
15 नवंबर केवल राज्य स्थापना दिवस ही नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती भी है। ‘धरती आबा’ को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे राज्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उनके आदर्श—जल, जंगल, जमीन—आज भी झारखंड की पहचान और आत्मा बने हुए हैं।
25 वर्षों में झारखंड की यात्रा
2000 में बिहार से अलग होकर बने झारखंड ने इन 25 वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखे।
इन दो दशकों में राज्य ने
- खनिज संपदा,
- पर्यटन,
- खेल,
- शिक्षा,
- और जनजातीय विकास
के क्षेत्रों में नई संभावनाएँ पैदा की हैं।
आज झारखंड युवा ऊर्जा, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के अनूठे मेल की वजह से देशभर में अलग पहचान बना चुका है।
लोगों में उत्साह, शहर में रौनक
राजधानी से लेकर जिलों तक सरकारी इमारतों, चौक-चौराहों और सांस्कृतिक स्थलों को सजाया गया है।
स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समूहों ने प्रभात फेरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह आयोजित किए।
नये संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का दिन
स्थापना दिवस पर लोगों ने राज्य के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय को मजबूत करने का संकल्प लिया।
युवा वर्ग में विशेष उत्साह देखा गया, जो झारखंड के अगले 25 वर्षों को ‘विकास और नवाचार’ का दशक बनाने का सपना देख रहा है।
