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    Home»Latest»रांची में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम ने दी दस्तक | CM हेमंत सोरेन बीमारी के रोकथाम को लेकर अलर्ट
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    रांची में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम ने दी दस्तक | CM हेमंत सोरेन बीमारी के रोकथाम को लेकर अलर्ट

    News Box BharatBy News Box BharatJanuary 31, 2025Updated:January 31, 20256 Mins Read
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    रांची। गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी ने रांची में दस्तक दे दी है। इस बीमारी से ग्रसित साढ़े पांच साल की बच्ची को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बच्ची को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। इलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि इस बीमारी से घबराने की जरुरत नहीं है, लेकिन सावधानी और समय पर इलाज एकमात्र बचाव का जरिया है। अब इस बीमारी के रोकथान को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी एक्शन मोड में आ गए हैं। हेमंत सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी के रोकथाम को लेकर की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस बीमारी के रोकथाम के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कर दें। साथ ही जरुरत पड़े तो जांच की प्रक्रिया शुरू करें। सभी अस्पतालों में इसके उपचार को लेकर टीम को अलर्ट मोड पर रखें।

    डॉक्टर ने क्या कहा

    गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से ग्रसित बच्ची का इलाज कर रहे चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ राजेश ने कहा कि यह कोई रेयर बीमारी नहीं । गुइलेन-बैरे सिंड्रोम यानी जीबीएस ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इम्यून सिस्टम अपनी ही बॉडी की नसों पर अटैक करता है। इसकी वजह से मरीज को चलने-फिरने और सांस लेने में परेशानी होती है। इससे बच्चों और बुजुर्गों को खतरा है। राजेश ने बताया कि अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग में चलने फिरने में परेशानी और कमजोरी की शिकायत दिखे तो फौरन डॉक्टर के पास पहुंचे। क्योंकि यह बीमारी बहुत तेजी से नसों पर अटैक करता है।

    क्या है गुइलेन-बैरे सिंड्रोम

    गुइलेन बैरे सिंड्रोम एक बीमारी है जिसका सटीक कारण फिलहाल मालूम नहीं है। हालांकि यह आम तौर पर संक्रमण के बाद होता है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से तंत्रिकाओं पर हमला करती है। यह तंत्रिका तंत्र को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसका पहला लक्षण हाथ पैर में झुनझुनी होता है। ये संवेदनाएं तेजी से फैल सकती हैं और गंभीर मामलों में पैरालिसिस भी हो सकता है। अब तक इसका कोई इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन लक्षणों का इलाज किया जाता है और इससे मरीज की रिकवरी में तेजी आ सकती है। माना जाता है कि जीबीएस तब होता है जब इम्यूनिटी पावर कम हो।

    इस बीमारी के लक्षण :- दस्त, पेट दर्द, बुखार और उल्टी शामिल है। यह बीमारी दूषित पानी या भोजन से भी हो सकता है।

    क्या सावधानी बरतनी चाहिए:- आम तौर पर डॉक्टर इसमें पानी उबाल कर पीने की सलाह देते हैं। इसके अलावा खुला हुआ या बासी खाना नहीं खाना चाहिए। अगर किसी को मांसपेशियों में खिंचाव के साथ कमजोरी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

    महाराष्ट्र में थम नहीं रहा गुइलेन-बैरे सिंड्रोम का कहर

    महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम का कहर बढ़ता ही जा रहा है, 31 जनवरी को राज्य में इस इम्यूनोलॉजिकल नर्व डिसऑर्जर से 2 और मौतों की खबर आ गई, इससे यहां कुल मौतों की संख्या 4 हो गई है। नए डेथ पिंपरी-चिंचवाड़ और पुणे में से प्रत्येक में एक-एक रिपोर्ट की गईं। डिटेल्स के मुताबिक, इलाके में 36 साल के मरीज की इस सिंड्रोम से मृत्यु हो गई।

    अलर्ट मोड में रहे स्वास्थ्य विभाग

    मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आज कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी के संक्रमण की रोकथाम एवं चिन्हित मरीजों के इलाज की व्यवस्थाओं को लेकर की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री डॉ इरफान अंसारी ऑनलाइन जुड़े थे। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गुइलेन-बैरे सिंड्रोम बीमारी के दुष्प्रभाव, लक्षण एवं बचाव से संबंधित जानकारी से अवगत कराया। इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, निदेशक रिम्स प्रो० (डॉ०) राज कुमार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक अबू इमरान एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलों के उपायुक्त तथा सिविल सर्जन उपस्थित रहे।

    आम जनमानस को जीबीएस से बचाव हेतु जागरूक करें

    समीक्षा के क्रम में सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी से ग्रस्त मरीजों की पहचान करने एवं अस्पतालों में उनके समुचित ईलाज की विशेष व्यवस्था रखें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जीबीएस के संक्रमण से बचने के लिए राज्य में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से बचाव के लिए आम जनमानस को जागरूक करने की आवश्यकता है। यह बीमारी दूषित जल और कच्चा भोजन सेवन करने से फैलता है। लोगों में इस बीमारी को लेकर कोई भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो यह सुनिश्चित किए जाएं।

    अस्पतालों में बेड, दवा सहित अन्य जरूरी व्यवस्था पुख्ता रखें

    मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में बेड, दवा, मेडिकल ऑक्सीजन इत्यादि की पुख्ता व्यवस्था रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बीमारी से संबंधित कोई भी केस मिलने पर तत्काल रिम्स रेफर करें। संदिग्ध मरीजों को रिम्स तक पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अलर्ट रखें ताकि ससमय मरीज को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि इस बीमारी से संबंधित न्यूज, एक्टिविटीज एवं अपडेट पर पैनी नजर रखें ताकि बीमारी के खतरे की तैयारी समय रहते की जा सके। बीमारी के इलाज में किसी को कई दिक्कत न हो यह भी सुनिश्चित करें।

    रिम्स जेबीएस को लेकर हाई अलर्ट मोड में

    समीक्षा के क्रम में रिम्स निदेशक प्रो० (डॉ०) राजकुमार ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को वर्चुअल माध्यम से गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी के मरीज की पहचान तथा उनके समुचित इलाज किस प्रकार की जाए इसकी विस्तृत जानकारी साझा की, साथ ही इस बीमारी से बचाव की गाईडलाइन शीघ्र सभी सिविल सर्जन सहित संबंधित तक उपलब्ध कराए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए रिम्स पूरी तरह तैयार है, कोई भी संदिग्ध केस मिलने पर आप तुरंत मरीज को रिम्स रेफर करें। रिम्स जेबीएस को लेकर हाई अलर्ट मोड में है। रिम्स निदेशक ने कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में सभी लोग इस बीमारी से बचाव के लिए आमजनों को अधिक से अधिक जागरूक करें।

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