
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट में उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उन्होंने सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए ‘अरब स्प्रिंग’ जैसा बयान दिया था। जोधपुर जेल में बंद वांगचुक ने कहा कि आलोचना करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
प्रमुख बिंदु:
- वीडियो पर विवाद: वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पुलिस ने एक वीडियो को गलत तरीके से पेश कर कोर्ट को गुमराह किया। वांगचुक ने हिंसा नहीं, बल्कि संवैधानिक वादों की बात की थी।
- धार्मिक आरोपों का खंडन: सिब्बल ने स्पष्ट किया कि हिंदू देवताओं के अपमान के आरोप निराधार हैं और यह आईटी सेल द्वारा फैलाया गया भ्रामक प्रचार है।
- स्वास्थ्य चिंताएं: कोर्ट ने वांगचुक की पेट संबंधी समस्याओं को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों (Gastroenterologist) से मेडिकल जांच कराने और सोमवार तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
- पृष्ठभूमि: वांगचुक को NSA के तहत 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। उन पर लद्दाख विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप है।
अगली सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अब 2 फरवरी 2026 को विचार करेगा।
