

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में एक्सिस बैंक के एक रिलेशनशिप मैनेजर (RM) मीत सभरवाल ने अपनी सूझबूझ से एक वरिष्ठ नागरिक को 6 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी धोखाधड़ी का शिकार होने से बचा लिया। ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के जरिए उनसे 64 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे, जिसे मैनेजर की त्वरित कार्रवाई से बचा लिया गया।
क्या था मामला?
- ठगों के एक साइबर गैंग ने खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग को डराया।
- उन्होंने बुजुर्ग को वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और कहा कि वह आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।
- डर के मारे बुजुर्ग ने 10 नवंबर को 5.9 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड को बेचने के लिए मजबूर किया। ये पैसे तीन दिन बाद उनके एक्सिस बैंक अकाउंट में आने वाले थे।
- इस बीच, 11 नवंबर को उन्होंने 20 लाख रुपये जमशेदपुर के एसबीआई अकाउंट में और 12 नवंबर को 44 लाख रुपये मुंबई के बांद्रा स्थित एक्सिस बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए, यानी कुल 64 लाख रुपये।
मैनेजर की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई
- एक्सिस बैंक की गैलेरिया मार्केट ब्रांच में, जहां बुजुर्ग का अकाउंट था, वहां के रिलेशनशिप मैनेजर मीत सभरवाल ने लगातार हो रहे इन बड़े और असामान्य ट्रांजैक्शन को देखा।
- उन्हें तुरंत धोखाधड़ी का संदेह हुआ। उन्होंने पीड़ित से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन डर के कारण बुजुर्ग ने फोन नहीं उठाया।
- मीट सभरवाल ने तुरंत एक्शन लेते हुए, जिन बैंकों में पैसे ट्रांसफर हुए थे (जमशेदपुर एसबीआई और एक्सिस बांद्रा), उनसे संपर्क किया और दोनों ही ट्रांसफर की गई राशियों को होल्ड (स्थगित) करवा दिया।
- इसके अलावा, उन्होंने बुजुर्ग और उनकी पत्नी के एक्सिस बैंक अकाउंट को भी फ्रीज (ब्लॉक) करवा दिया ताकि आगे कोई और पैसे ट्रांसफर न हो सकें।
पुलिस में शिकायत और सम्मान
- 18 नवंबर को, ‘डिजिटल अरेस्ट’ खत्म होने के बाद, बुजुर्ग ने आखिरकार मीत सभरवाल से बात की और पूरी ठगी के बारे में बताया। मैनेजर ने उन्हें पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए राजी किया।
- गुड़गांव पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और बांद्रा ब्रांच के साथ मिलकर काम किया, जहां ठगों का अकाउंट था।
- इस साहसिक और निर्णायक कार्रवाई के लिए, पुलिस कमिश्नर विकास अरोड़ा ने शुक्रवार को मीत सभरवाल को 20,000 रुपये का इनाम और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया।
- पुलिस ने जनता से सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि भारत में कोई भी पुलिस या सुरक्षा एजेंसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती है। किसी भी संदिग्ध कॉल या लेन-देन की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।