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    Home»Latest»झारखंड में 74 लाख से अधिक का राशन खतरे में ! eKYC न होने से डिलीशन की आशंका
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    झारखंड में 74 लाख से अधिक का राशन खतरे में ! eKYC न होने से डिलीशन की आशंका

    News Box BharatBy News Box BharatJuly 16, 20254 Mins Read
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    eKYC : भोजन का अधिकार अभियान ने आशंका जताई है कि झारखंड में बड़ी संख्या में राशन कार्डों का विलोपन (डिलीशन) हो सकता है। इस गंभीर चिंता के मद्देनजर, संस्था ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राशन कार्डों के विलोपन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत लाभ प्राप्त कर रहे सभी कार्डधारकों के लिए ई-केवाईसी (eKYC) पूरा करने की अंतिम तिथि 30 जून 2025 निर्धारित की थी।

    चिंताजनक आंकड़े

    • जन वितरण प्रणाली (PDS) के आहार पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 14 जुलाई तक राष्ट्रीय और राज्य खाद्य सुरक्षा योजनाओं के तहत 74.6 लाख लोगों का ई-केवाईसी पूरा नहीं हुआ है।
    • इनमें से 8.24 लाख राशन कार्ड ऐसे हैं, जिनमें एक भी सदस्य का ई-केवाईसी नहीं हुआ है।

    भयावह परिणाम की आशंका

    • भोजन का अधिकार अभियान के संयोजक अशर्फी नंद प्रसाद के अनुसार, तकनीकी और व्यवस्थागत समस्याओं के कारण लाखों गरीब राशन कार्ड धारकों को उनके राशन के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।
    • संस्था ने याद दिलाया कि झारखंड में वर्ष 2017 और 2018 में राशन की कमी के कारण 17 लोगों की मृत्यु हो गई थी।
    • चेतावनी देते हुए कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर कार्डों का विलोपन बड़ी संख्या में गरीबों को भूख और कुपोषण की ओर धकेल सकता है।
    • इसका विशेष रूप से वृद्ध, दिव्यांग, प्रवासी मजदूर, बच्चों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ने की आशंका है।
    • अभियान ने मुख्यमंत्री से विशेष अनुरोध किया है कि आदिम जनजाति परिवारों को बिना किसी सत्यापन के विशेष तौर पर सुरक्षित रखा जाए।

    ई-केवाईसी न हो पाने के प्रमुख कारण

    1. दुर्गमता और असमर्थता: बड़ी संख्या में वृद्ध और विकलांग कार्डधारक दूरी या शारीरिक सीमाओं के कारण उचित मूल्य की दुकानों (FPS) तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
    2. बायोमेट्रिक विफलता: ई-पीओएस (ePOS) मशीनें अक्सर बुजुर्गों और शारीरिक श्रम करने वाले मजदूरों की उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) को पढ़ने में असमर्थ रहती हैं। यह एक पुरानी समस्या है जिसका अभी तक समाधान नहीं निकाला गया है।
    3. बाल आधार की समस्या: कई गरीब परिवारों के बच्चों के पास या तो आधार कार्ड ही नहीं है या फिर उनके पास केवल बाल आधार है। बाल आधार में बायोमेट्रिक रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे वे ई-केवाईसी के लिए अपात्र हो जाते हैं।
    4. खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी: ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इंटरनेट की खराब स्थिति के कारण ई-केवाईसी की प्रक्रिया बेहद मुश्किल हो गई है। इसके अलावा, पुरानी 2G ई-पीओएस मशीनें भी इंटरनेट समस्याओं से ग्रस्त हैं।
    5. प्रवासी मजदूरों की चुनौती: बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अभी तक ई-केवाईसी पूरा नहीं कर पाए हैं। कई लोगों को यह भी जानकारी नहीं है कि ई-केवाईसी कहाँ और कैसे कराई जाती है।
    6. ‘मेरा eKYC’ ऐप की विफलता: यह ऐप कई तकनीकी कारणों से काम नहीं करता, जैसे:
      • आधार कार्ड का डेटा अपडेट न होना।
      • राशन कार्ड डेटाबेस से जानकारी न खोज पाना।
      • इस ऐप के माध्यम से ई-केवाईसी की सफलता दर बहुत कम है।

    समस्या के समाधान हेतु अभियान के सुझाव

    1. कारणों का कोडित सत्यापन: राशन डीलरों द्वारा ई-केवाईसी न हो पाने के कारणों की एक कोडित सूची (Codefied List) के आधार पर सत्यापन प्रक्रिया की जाए।
    2. कारणों का दर्ज होना: इन सत्यापित कारणों को ई-पीओएस मशीन के जरिए या ब्लॉक स्तर के ऑपरेटर द्वारा दर्ज किया जाए।
    3. डेटा विश्लेषण: सत्यापन के बाद प्राप्त आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया जाए। विश्लेषण से यह स्पष्ट होगा कि कई कारण ऐसे हैं जो लाभार्थी की पात्रता को उचित ठहराते हैं और उन पर उनका नियंत्रण नहीं है।
    4. पात्र लाभार्थियों की सुरक्षा: इस विश्लेषण के आधार पर, पात्र लाभार्थियों के नामों को विलोपन (डिलीशन) से सुरक्षित रखा जाए। सत्यापित तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं के कारण ई-केवाईसी न करा पाने वाले लोगों को राशन मिलना जारी रहना चाहिए।
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