
रांची। झारखंड में उच्च शिक्षा और सरकारी भर्ती व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने दो अहम निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) दोबारा कराने और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष व सदस्यों के रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार को समयसीमा तय करते हुए निर्देश जारी किया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि JET आयोजित कराने के लिए JPSC को नए सिरे से अधियाचना भेजी जाए। अधियाचना मिलने के बाद JPSC को छह महीने के भीतर परीक्षा आयोजित कर अंतिम परिणाम जारी करना होगा। यह मामला विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर और शिक्षकेतर कर्मचारियों के नियमित पदों पर सीधी नियुक्ति के बजाय संविदा के आधार पर सेवाएं लिए जाने से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। अधिवक्ता धीरज कुमार के अनुसार, अनिकेत ओहदार और अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने JET को लेकर यह निर्देश दिया।
2024 में अटक गई थी JET की प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से अदालत को बताया गया कि वर्ष 2024 में JET परीक्षा की मॉडल उत्तर कुंजी जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गई थीं। इसी दौरान आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे और कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में राज्य सरकार ने JET का विज्ञापन ही रद्द कर दिया था। चूंकि विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी गई थी, इसलिए अदालत ने अब पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने का निर्देश दिया है।
JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पर भी सख्ती
हाईकोर्ट ने JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को लेकर भी राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि दो महीने के भीतर JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए। यह मामला राज्य के वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़ी एक स्वतः संज्ञान वाली याचिका की सुनवाई के दौरान उठा। इस दौरान अदालत ने आयोग के शीर्ष पदों के लंबे समय से खाली रहने को लेकर चिंता जताई।
18 नवंबर तक देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
राज्य सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के संबंध में 18 नवंबर 2026 तक हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता रोहित राय और अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सरकार निर्धारित दो महीने की अवधि के भीतर JPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर लेगी।
युवाओं और अभ्यर्थियों के लिए अहम फैसला
JET और JPSC दोनों ही झारखंड के उच्च शिक्षा और सरकारी भर्ती से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के इन निर्देशों से लंबे समय से परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में देरी का सामना कर रहे अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब राज्य सरकार और JPSC के सामने तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी होगी।
निष्कर्ष: झारखंड हाईकोर्ट ने JET और JPSC को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और आयोग इन निर्देशों के अनुसार भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाते हैं।
