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    Home»International»Canada से 8 साल बाद भारतीय परिवार की वापसी, शरण की अर्जी खारिज होने पर ट्रक ड्राइवर हरीश को छोड़ना पड़ा देश
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    Canada से 8 साल बाद भारतीय परिवार की वापसी, शरण की अर्जी खारिज होने पर ट्रक ड्राइवर हरीश को छोड़ना पड़ा देश

    News Box BharatBy News Box BharatSeptember 10, 20264 Mins Read
    कनाडा में करीब आठ साल रहने के बाद शरण की अर्जी खारिज होने पर भारतीय परिवार को भारत लौटना पड़ा।
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    कनाडा के क्यूबेक में करीब आठ साल तक रहने के बाद एक भारतीय परिवार को देश छोड़कर भारत लौटना पड़ा। भारतीय ट्रक ड्राइवर हरीश कुमार, उनकी पत्नी सोनिका और उनके दो बच्चे जापेश और गौलाश की शरणार्थी बनने की अर्जी खारिज हो गई। मानवीय आधार पर कनाडा में रहने की उनकी अपील भी स्वीकार नहीं हुई। इसके बाद परिवार को भारत लौटना पड़ा।

    8 साल कनाडा में रहने के बाद लौटे भारत

    हरीश कुमार अपने परिवार के साथ अप्रैल 2018 में कनाडा गए थे। उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए कनाडा में शरण मांगी थी। कई वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद परिवार को कनाडा छोड़ने का आदेश दिया गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक परिवार 7 सितंबर 2026 को कनाडा से भारत के लिए रवाना हुआ। इससे पहले 4 अगस्त को उन्हें बताया गया था कि उनका रिफ्यूजी क्लेम खारिज कर दिया गया है और उन्हें 7 सितंबर तक देश छोड़ना होगा।

    ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करते थे हरीश

    हरीश कुमार ने कनाडा में ट्रक ड्राइवर के रूप में काम किया। उनके समर्थकों और अप्रवासी अधिकार संगठन के मुताबिक, कोविड महामारी के दौरान उन्होंने सामान पहुंचाने का काम जारी रखा था।

    इमिग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने परिवार के निर्वासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि संकट के समय हरीश जैसे कर्मचारियों को जरूरी माना गया, लेकिन बाद में उनके वर्षों के काम, टैक्स भुगतान और समुदाय में योगदान के बावजूद उन्हें कनाडा में रहने की अनुमति नहीं मिली।

    बच्चों पर भी पड़ा असर

    हरीश के दोनों बच्चों ने कनाडा में कई साल स्कूल में पढ़ाई की और वहीं बड़े हुए। परिवार के निर्वासन के बाद बच्चों को भी कनाडा छोड़ना पड़ा।

    इमिग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने इस पहलू पर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय तक क्यूबेक में रहने और पढ़ाई करने के बाद बच्चों को अचानक वहां से हटाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।

    पत्नी को भी हिरासत में लिया गया था

    हरीश के अनुसार, परिवार के भारत लौटने से कुछ दिन पहले उनकी पत्नी को Canada Border Services Agency (CBSA) ने हिरासत में लिया था।

    कनाडाई अधिकारियों के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति के खिलाफ वैध removal order लागू हो जाता है तो इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 48 के तहत CBSA को उसे जल्द से जल्द कनाडा से हटाना होता है।

    आखिर शरण की अर्जी क्यों खारिज हुई?

    हरीश ने भारत छोड़ने की वजह अपनी जान को खतरा बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के गोराया में उनकी किराने की छोटी दुकान थी और उनका दावा था कि उनसे चुनाव प्रचार के लिए पैसे मांगे गए तथा कथित तौर पर जान से मारने की धमकी भी दी गई थी।

    हालांकि कनाडाई अधिकारियों ने उनके शरणार्थी दावे को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद मानवीय आधार पर कनाडा में रहने की अपील भी असफल रही और परिवार को वापस भारत लौटना पड़ा।

    8 साल बाद सब कुछ पीछे छूटा

    हरीश और उनके परिवार के लिए यह फैसला इसलिए भी भावनात्मक है क्योंकि उन्होंने कनाडा में करीब आठ साल बिताए। बच्चों की पढ़ाई और परिवार का जीवन वहीं आगे बढ़ा। लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अपना जीवन फिर से भारत में शुरू करना होगा।

    यह मामला कनाडा में रह रहे उन अप्रवासी परिवारों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी दिखाता है, जिनकी शरण या मानवीय आधार पर रहने की अपील स्वीकार नहीं होती।

    बड़ी बातें

    • भारतीय परिवार करीब 8 साल कनाडा के क्यूबेक में रहा।
    • परिवार अप्रैल 2018 में कनाडा गया था।
    • हरीश कुमार ट्रक ड्राइवर के तौर पर काम करते थे।
    • उनका रिफ्यूजी क्लेम खारिज कर दिया गया।
    • मानवीय आधार पर कनाडा में रहने की अपील भी अस्वीकार हुई।
    • परिवार 7 सितंबर 2026 को भारत लौट आया।
    • बच्चों ने कनाडा में कई साल पढ़ाई की थी।

    कनाडा में बेहतर जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचे हरीश कुमार और उनके परिवार को करीब आठ साल बाद भारत लौटना पड़ा। शरणार्थी दावा और मानवीय आधार पर रहने की अपील खारिज होने के बाद कनाडाई अधिकारियों ने परिवार को देश छोड़ने का आदेश दिया। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि लंबे समय तक किसी देश में रहने और वहां काम करने के बावजूद इमिग्रेशन कानूनों के तहत कानूनी स्थिति सबसे महत्वपूर्ण होती है।

    Canada News Indian Family
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