
भारत के मॉनसून को लेकर मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा El Niño 2026 की दूसरी छमाही में बेहद मजबूत रूप ले सकता है। ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने जून में चेतावनी दी थी कि यह घटना सात दशकों में दर्ज सबसे मजबूत El Niño घटनाओं में शामिल हो सकती है। अब नए पूर्वानुमानों में इसकी तीव्रता और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
इसका असर भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि El Niño अक्सर भारतीय मॉनसून को कमजोर करने वाली परिस्थितियों से जुड़ा रहा है। हालांकि इस बार Indian Ocean Dipole (IOD) जैसे दूसरे मौसम कारक इसके असर को कुछ हद तक बदल सकते हैं। इसलिए पूरे देश में एक जैसा मौसम होने की बात अभी नहीं कही जा सकती।
El Niño इतना बड़ा खतरा क्यों माना जा रहा है?
El Niño तब विकसित होता है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे हवा और वायुमंडलीय दबाव का पैटर्न बदलता है और उसका असर हजारों किलोमीटर दूर दूसरे देशों के मौसम पर भी पड़ सकता है।
2026 में समुद्र के तापमान और वातावरण दोनों में El Niño से जुड़े संकेत मजबूत हुए हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी कहा है कि El Niño आने वाले महीनों में तेजी से मजबूत हो सकता है और इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी, सूखा, भारी बारिश और दूसरी चरम मौसम घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
भारत में अगस्त से अक्टूबर तक क्या हो सकता है?
यही इस पूरी कहानी का सबसे अहम हिस्सा है।
ECMWF के मौसमी पूर्वानुमान में अगस्त से अक्टूबर के दौरान भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना दिखाई गई है। खासकर मध्य और पश्चिमी भारत के कई हिस्से चिंता के दायरे में हैं। जुलाई के पूर्वानुमान में महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में कम बारिश का जोखिम बताया गया था।
हालांकि मौसमी मॉडल को किसी खास शहर या जिले के लिए निश्चित बारिश का फैसला नहीं माना जा सकता। ECMWF का seasonal system संभावनाओं और अलग-अलग मॉडल रन पर आधारित होता है।
क्या पूरे भारत में बारिश कम हो जाएगी?
जरूरी नहीं।
यही बात इस खबर को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। El Niño का प्रभाव पूरे देश में एक जैसा नहीं होता।
Positive IOD यानी Indian Ocean Dipole का सकारात्मक चरण कुछ इलाकों में El Niño के सूखे प्रभाव को कम कर सकता है। उपलब्ध पूर्वानुमानों में अगस्त और सितंबर के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के मिश्रित पैटर्न के संकेत हैं। कहीं सामान्य से कम बारिश हो सकती है तो कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।
इसका मतलब है कि एक तरफ किसी इलाके में बारिश की कमी हो सकती है, जबकि दूसरे इलाके में कम समय में तेज बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है।
अभी बारिश हो रही है तो चिंता क्यों?
यह सवाल स्वाभाविक है कि जब देश के कई हिस्सों में फिलहाल अच्छी बारिश हो रही है, तब El Niño को लेकर चिंता क्यों?
दरअसल, मौसम और मौसमी जलवायु पूर्वानुमान दो अलग चीजें हैं।
14 अगस्त को IMD के पूर्वानुमान में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, झारखंड समेत कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई गई थी। यानी फिलहाल सक्रिय मॉनसून और आने वाले महीनों का El Niño प्रभाव एक-दूसरे के विरोधाभासी नहीं हैं।
समस्या यह हो सकती है कि मॉनसून के बाद के चरण में बारिश की frequency और distribution बदल जाए।
खेती पर पड़ सकता है सीधा असर
भारत की खेती का बड़ा हिस्सा मॉनसून पर निर्भर है। इसलिए अगर अगस्त-सितंबर में लंबे dry spells आते हैं तो इसका असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है।
धान, सोयाबीन, कपास, मक्का और दालों जैसी फसलों के लिए बारिश का सही समय बेहद महत्वपूर्ण है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस साल की बारिश पहले ही सामान्य से नीचे चल रही है और पश्चिमी, मध्य तथा दक्षिणी हिस्सों में मॉनसून कमजोर पड़ने का जोखिम फसलों के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
हालांकि वैश्विक अनाज भंडार और कृषि तकनीक में सुधार के कारण संभावित El Niño का असर पिछली बड़ी घटनाओं की तुलना में कुछ हद तक संभाला जा सकता है। फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर किसानों के लिए जोखिम बना हुआ है।
सबसे बड़ा खतरा सिर्फ कम बारिश नहीं
El Niño को केवल सूखे से जोड़कर देखना भी सही नहीं होगा।
इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का संतुलन बदल सकता है। कुछ जगहों पर सूखा और गर्मी बढ़ सकती है, जबकि दूसरी जगहों पर अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। WMO भी El Niño के साथ extreme rainfall और drought दोनों की संभावना बढ़ने की बात कह चुका है।
भारत में भी इसलिए आने वाले महीनों को सिर्फ “कम बारिश” के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। बारिश कब, कहां और कितनी होती है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
2026 का El Niño कितना मजबूत हो सकता है?
मौजूदा अनुमानों में यह El Niño सामान्य घटना से काफी मजबूत हो सकता है। Climate Impact Company के अगस्त अपडेट में ECMWF के मॉडल के आधार पर 2026-27 के El Niño को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की संभावना बताई गई है।
हालांकि अलग-अलग मौसम मॉडल में अंतर है और इतनी लंबी अवधि के पूर्वानुमानों में अनिश्चितता भी रहती है। इसलिए इसे अभी संभावित बड़ा मौसम जोखिम कहना ज्यादा उचित है, न कि निश्चित आपदा।
भारत के लिए आने वाले कुछ महीने मौसम की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। El Niño मजबूत होता है तो मॉनसून के आखिरी चरण में बारिश का वितरण बिगड़ सकता है, लेकिन इसका मतलब पूरे देश में सूखा पड़ना नहीं है।
अभी सबसे ज्यादा नजर अगस्त-सितंबर की बारिश, El Niño की वास्तविक तीव्रता और Indian Ocean Dipole के व्यवहार पर रहेगी। इन तीनों का मेल तय करेगा कि 2026 का बाकी मॉनसून भारत के लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहता है।
