
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में सामने आए कथित करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले में अब बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय से जुड़े कर्मचारी इल्हाम-उर-रहमान शम्सी को प्रबंधन की ओर से बर्खास्त किए जाने की खबर सामने आई है। इस मामले में सरकारी धन को फर्जी खातों और दस्तावेजों के जरिए इधर-उधर किए जाने के आरोपों की जांच चल रही है।
कैसे सामने आया मामला?
मामला उस समय सामने आया जब सरकारी धन से जुड़े खातों में असामान्य और बड़े लेन-देन की जानकारी अधिकारियों तक पहुंची। इसके बाद जांच शुरू हुई और कथित तौर पर कई बैंक खातों में सरकारी रकम ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस जांच में 53 बैंक खातों को फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन खातों में कथित तौर पर घोटाले की रकम पहुंचने की आशंका जताई गई थी।
करोड़ों की रकम के हेरफेर का आरोप
शम्सी पर आरोप है कि उसने शिक्षा विभाग से जुड़े सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कर रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाया।
मीडिया रिपोर्टों में कथित रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में करीब ₹5.5 करोड़ की कथित हेराफेरी का उल्लेख हुआ, जबकि बाद की जांच में रकम करीब ₹6 करोड़ या उससे अधिक होने की बात सामने आई।
कुछ रिपोर्टों में इससे भी बड़ी रकम का दावा किया गया है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी एक अंतिम आंकड़े को घोटाले की अंतिम रकम मानना सही नहीं होगा।
फर्जी खातों के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसियों के मुताबिक कथित तौर पर फर्जी beneficiary IDs और भुगतान रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके रकम को अलग-अलग बैंक खातों तक पहुंचाया गया।
एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 98 लेन-देन के जरिए रकम को 53 अलग-अलग खातों में भेजे जाने की बात सामने आई थी। पुलिस की जांच में यह भी आरोप सामने आया कि इन खातों का संबंध आरोपी के रिश्तेदारों और परिचितों से था।
कई बैंक खाते किए गए फ्रीज
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने कथित तौर पर कई बैंक खातों को फ्रीज कराया। अधिकारियों का उद्देश्य उन खातों में मौजूद रकम को सुरक्षित रखना और यह पता लगाना है कि सरकारी धन आखिर किन-किन खातों में पहुंचा।
रिपोर्टों के मुताबिक ₹5 करोड़ से ज्यादा की रकम से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
आरोपी कर्मचारी पर कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण?
इस मामले में प्रबंधन की ओर से बर्खास्तगी की कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोप सरकारी धन और वेतन भुगतान की प्रक्रिया में कथित हेराफेरी से जुड़े हैं।
हालांकि, बर्खास्तगी प्रशासनिक कार्रवाई है और इससे किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोप अपने आप साबित नहीं हो जाते। मामले में जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम जिम्मेदारी तय होगी।
जांच में और नाम सामने आने की संभावना
पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित रकम किन-किन लोगों तक पहुंची और भुगतान प्रक्रिया में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी या नहीं।
रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में कई लोगों के बैंक खातों की जांच की गई है और कुछ संदिग्ध खातों पर कार्रवाई भी हुई है।
एक नजर में
- मामला: पीलीभीत सरकारी धन/वेतन घोटाला
- मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आया नाम: इल्हाम-उर-रहमान शम्सी
- विभाग: जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़ा मामला
- आरोप: सरकारी धन को कथित रूप से फर्जी खातों में ट्रांसफर करना
- बैंक खाते: 53 खातों पर कार्रवाई/फ्रीज की जानकारी
- कथित रकम: अलग-अलग रिपोर्टों में ₹5.5 करोड़ से ₹6 करोड़ से अधिक के आंकड़े
- ताजा कार्रवाई: प्रबंधन की ओर से बर्खास्तगी
- स्थिति: जांच जारी
पीलीभीत का यह मामला सरकारी भुगतान व्यवस्था में निगरानी और वित्तीय नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर जांच में आरोप साबित होते हैं तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि इतनी बड़ी रकम लंबे समय तक सिस्टम से कैसे निकलती रही।
फिलहाल मामले में आरोपों की जांच जारी है और अंतिम जिम्मेदारी जांच व न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
