

सिडनी: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मुकाबले के दौरान टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर फील्डिंग करते समय गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं। एलेक्स कैरी का कैच लपकने की कोशिश में अय्यर को पसली के निचले हिस्से में तेज चोट लगी, जिसके बाद उन्हें तुरंत मैदान से बाहर ले जाया गया और सिडनी के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बीसीसीआई (BCCI) ने इस चोट पर अपडेट देते हुए बताया कि श्रेयस को ‘स्प्लीन लैसरेशन’ (Spleen Laceration) हुआ है, जिसके कारण उन्हें आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) भी झेलना पड़ा। बताया जा रहा है कि चोट की गंभीरता के चलते उन्हें आईसीयू (ICU) में भी रखना पड़ा था। हालांकि, अब उनकी हालत स्थिर है और वह रिकवरी कर रहे हैं।
इस खबर के बाद, हर कोई यह जानना चाहता है कि यह स्प्लीन क्या है और इसमें चोट लगने पर इतना बड़ा खतरा क्यों होता है। आइए समझते हैं इस छोटे लेकिन बेहद जरूरी अंग से जुड़े 5 खास फैक्ट्स:
श्रेयस अय्यर को जिस अंग में हुई इंजरी, उसका काम क्या है? समझें स्प्लीन से जुड़े 5 फैक्ट
1. स्प्लीन की लोकेशन और काम: स्प्लीन, जिसे हिंदी में तिल्ली भी कहा जाता है, हमारे शरीर के बाएं ओर, पसलियों के नीचे और पेट के ठीक ऊपर स्थित एक छोटा सा अंग है। इसका मुख्य काम हमारे खून को फिल्टर करना है।
2. ब्लड सेल्स का ‘रिफाइनरी’: स्प्लीन पुरानी या डैमेज हो चुकी रेड ब्लड सेल्स (RBCs) को शरीर से हटाता है, बिल्कुल एक रिफाइनरी की तरह। साथ ही, यह संक्रमण से लड़ने के लिए नई व्हाइट ब्लड सेल्स (WBCs) भी तैयार करता है।
3. शरीर का ‘इम्यूनिटी बूस्टर’: यह हमारे इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) का एक अभिन्न अंग है। स्प्लीन खून में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस की पहचान करके उन्हें खत्म करने में मदद करता है, जिससे शरीर बीमारियों से बचा रहता है।
4. खून का ‘रिजर्व टैंक’: स्प्लीन शरीर के लिए खून को स्टोर करके भी रखता है। किसी चोट या दुर्घटना के दौरान जब शरीर में खून की कमी होती है, तो स्प्लीन में जमा यही ‘रिजर्व ब्लड’ काम आता है और शरीर को तत्काल खून की सप्लाई करता है।
5. स्प्लीन लैसरेशन और खतरा: जब पेट पर कोई जोरदार चोट लगती है या कोई व्यक्ति अचानक भारी झटके से गिरता है, तो स्प्लीन में दरार आ सकती है या वह फट सकता है। इसी इंजरी को ‘स्प्लीन लैसरेशन’ कहते हैं। इसमें आंतरिक रक्तस्राव शुरू हो जाता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर ब्लीडिंग ज्यादा हो जाए तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
इलाज और रिकवरी
डॉक्टरों के अनुसार, स्प्लीन में हल्की चोट लगने पर आमतौर पर आराम और निगरानी (Monitoring) की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर ब्लीडिंग गंभीर हो, तो सर्जरी करनी पड़ सकती है, जिसे स्प्लीनेक्टॉमी (Splenectomy) कहते हैं। इसमें स्प्लीन का कुछ हिस्सा या पूरा अंग हटाना पड़ता है। हालांकि, स्प्लीन हटने के बाद मरीज की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और उसे भविष्य में संक्रमण से बचने के लिए खास सावधानी बरतनी पड़ती है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स ने यह भी साफ किया है कि इस तरह की इंजरी से उबरने के बाद मरीज को कम से कम कुछ हफ्तों तक किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि या स्पोर्ट्स से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। श्रेयस अय्यर को फिलहाल डॉक्टरी सलाह, दवाइयां, स्वस्थ आहार और भरपूर आराम की सख्त जरूरत होगी। फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि यह स्टार बल्लेबाज जल्द ही पूरी तरह ठीक होकर मैदान पर वापसी करेगा।