
बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के बेटे भागीरथ मांझी अपनी चुनावी उम्मीदवारी को लेकर दिल्ली पहुँचे हैं, जहाँ वे कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने के लिए चार दिनों से डेरा डाले हुए हैं। भागीरथ मांझी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे गया जिले की बाराचट्टी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं और उन्होंने राहुल गांधी से टिकट देने का वादा पूरा करने की अपील की है।
महादलित समुदाय को साधने की रणनीति और टिकट का वादा
भागीरथ मांझी को कांग्रेस पार्टी में शामिल कराने के पीछे मुख्य उद्देश्य बिहार की महादलित जातियों के बीच पार्टी की पकड़ को मजबूत करना था। यह कदम राहुल गांधी की पहल पर उठाया गया था, जिन्होंने कथित तौर पर भागीरथ मांझी को न केवल पार्टी में शामिल कराया, बल्कि उनके लिए पक्का घर भी बनवाया था। भागीरथ मांझी का दावा है कि राहुल गांधी ने उनसे टिकट दिलवाने का वादा किया था।
‘वादा पूरा करें, नहीं तो निर्दलीय लड़ेंगे’
बिहार में चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद, भागीरथ मांझी अब अपना टिकट पक्का करने की उम्मीद में दिल्ली में हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर उन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला, तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। भागीरथ मांझी का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो राहुल गांधी पर सवाल उठेंगे क्योंकि उन्होंने ही टिकट देने का वादा किया था।
बाराचट्टी सीट पर पेच
भागीरथ मांझी जिस बाराचट्टी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता रहे हैं, वह सीट इस समय गठबंधन के भीतर जटिल समीकरणों का केंद्र बनी हुई है।
- पिछली बार इस सीट से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने चुनाव लड़ा था।
- इस बार सीपीआई (एमएल) पार्टी भी इस सीट को अपने लिए मांग रही है, और वह जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय को यहाँ से उतारना चाहती है।
- वर्तमान में इस सीट से जीतनराम मांझी की समधन विधायक हैं।
ऐसे में, भागीरथ मांझी की टिकट की माँग ने बिहार के चुनावी माहौल में न केवल महादलित राजनीति को केंद्र में ला दिया है, बल्कि कांग्रेस और महागठबंधन के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
