
नई दिल्ली: भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 में देशभर की पारंपरिक हस्तकलाओं और वस्त्र कला का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। इनमें आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध कलमकारी कला विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बांस की कलम और प्राकृतिक रंगों से कपड़े पर बनाई जाने वाली यह प्राचीन कला न केवल भारतीय संस्कृति की झलक दिखाती है, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही कहानी कहने की परंपरा को भी जीवित रखे हुए है।
क्या है कलमकारी कला?
‘कलमकारी’ शब्द दो फ़ारसी शब्दों से मिलकर बना है—’कलम’ यानी पेन और ‘कारी’ यानी कारीगरी। इस कला में बांस की विशेष कलम का उपयोग कर सूती कपड़े पर हाथ से चित्र बनाए जाते हैं। चित्रों में भगवान राम, कृष्ण, महाभारत, रामायण और अन्य धार्मिक व सांस्कृतिक प्रसंगों को बेहद बारीकी से उकेरा जाता है।
प्राकृतिक रंगों से तैयार होती है हर कलाकृति
कलमकारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी रासायनिक रंग का उपयोग नहीं किया जाता। कलाकार पेड़-पौधों की छाल, जड़ों, पत्तियों, फूलों और खनिज तत्वों से प्राकृतिक रंग तैयार करते हैं। एक कलाकृति को पूरा करने में कई चरणों की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें कपड़े की विशेष तैयारी, हाथ से चित्रांकन, रंग भरना और बार-बार धुलाई शामिल होती है।
दो प्रमुख शैलियों में विकसित हुई कला
कलमकारी की दो प्रमुख शैलियां प्रसिद्ध हैं। पहली श्रीकालहस्ती शैली, जिसमें पूरी पेंटिंग हाथ से बनाई जाती है और धार्मिक कथाओं पर आधारित होती है। दूसरी मछलीपट्टनम शैली, जिसमें लकड़ी के ब्लॉक से डिज़ाइन छापे जाते हैं और बाद में प्राकृतिक रंगों से सजाया जाता है। दोनों शैलियां अपनी अलग पहचान और कलात्मक विशेषताओं के लिए जानी जाती हैं।
भारत टेक्स 2026 में आकर्षण का केंद्र
भारत टेक्स 2026 में कलमकारी से बनी साड़ियां, दुपट्टे, वॉल हैंगिंग, स्कार्फ, पेंटिंग, बैग और सजावटी वस्तुएं बड़ी संख्या में प्रदर्शित की गई हैं। देश-विदेश से आए खरीदार और पर्यटक इन हस्तनिर्मित उत्पादों में खास रुचि दिखा रहे हैं। आयोजन का उद्देश्य भारतीय वस्त्र परंपरा और स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ना भी है।
परंपरा और रोजगार का संगम
कलमकारी केवल एक कला नहीं बल्कि हजारों कारीगर परिवारों की आजीविका का प्रमुख माध्यम भी है। आधुनिक फैशन उद्योग में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। पारंपरिक तकनीक और आधुनिक डिज़ाइन के मेल से यह कला अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत पहचान
भारत टेक्स 2026 जैसे मंच यह साबित करते हैं कि भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प आज भी वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए हैं। कलमकारी जैसी प्राचीन कला नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, इतिहास और शिल्प परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
