
पाकिस्तान की चर्चित मानवाधिकार वकील और सामाजिक कार्यकर्ता इमान ज़ैनब मज़ारी-हाज़िर और उनके पति हादी अली चत्था को इस्लामाबाद की एक अदालत ने PECA (Prevention of Electronic Crimes Act) के तहत दोषी ठहराते हुए 17-17 साल की कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। यह मामला न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
कौन हैं इमान मज़ारी?
इमान मज़ारी पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार वकील हैं, जो लंबे समय से enforced disappearances यानी जबरन ग़ायब किए जाने के मामलों पर काम करती रही हैं, खासकर बलूचिस्तान और बलूच समुदाय से जुड़े मामलों में। उन्होंने कई कार्यकर्ताओं, जिनमें महरंग बलोच भी शामिल हैं, का प्रो-बोनो (मुफ़्त) कानूनी बचाव किया है।
वे पाकिस्तान की पूर्व मानवाधिकार मंत्री शिरीन मज़ारी की बेटी हैं, जो इमरान ख़ान की PTI सरकार में मंत्री रह चुकी हैं।
जनवरी 2026 में क्या हुआ?
23 जनवरी 2026 को इस्लामाबाद पुलिस ने इमान मज़ारी और उनके पति को उस समय गिरफ़्तार किया, जब वे इस्लामाबाद हाई कोर्ट से सेशन्स कोर्ट जा रहे थे। आरोप है कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनकी कार की खिड़कियाँ तोड़ीं और अत्यधिक बल प्रयोग किया। इस समय उनके साथ बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
यह गिरफ्तारी एक तथाकथित “ट्वीट्स केस” से जुड़ी थी, जिसमें उन पर राज्य-विरोधी सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप लगाया गया।
कोर्ट का फैसला
24 जनवरी 2026 को इस्लामाबाद के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन्स कोर्ट ने दोनों को PECA कानून के तहत कई धाराओं में दोषी ठहराया।
सज़ा का पूरा ब्योरा:
- सेक्शन 9: 5 साल की सज़ा + 50 लाख रुपये जुर्माना
- सेक्शन 10: 10 साल की सज़ा + 30 मिलियन रुपये जुर्माना
- सेक्शन 26A: 2 साल की सज़ा + 10 लाख रुपये जुर्माना
➡️ कुल सज़ा: 17 साल (सज़ाएँ साथ-साथ चलेंगी)
➡️ कुल जुर्माना: लगभग 72 मिलियन रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 36 मिलियन रुपये प्रत्येक)
कोर्ट के अनुसार आरोप
अदालत के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच इमान मज़ारी के X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट्स में:
- पाकिस्तान को “टेररिस्ट स्टेट” कहा गया
- सेना और सुरक्षा बलों पर बलूचिस्तान व KPK में जबरन ग़ायब करने के आरोप लगाए गए
- न्यायपालिका को पक्षपाती बताया गया
- कुछ पोस्ट्स को PTM और BLA जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जोड़ा गया
डिफेंस का पक्ष और विवाद
इमान मज़ारी और हादी अली चत्था ने सुनवाई का बहिष्कार किया। उनका आरोप है कि:
- उन्हें ड्यू प्रोसेस नहीं दिया गया
- वीडियो लिंक के ज़रिए पेशी के दौरान खाना-पानी तक नहीं दिया गया
- हाई कोर्ट द्वारा बेल बहाल किए जाने के बावजूद उन्हें दोबारा गिरफ़्तार किया गया
देश-विदेश में प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद:
- Amnesty International, Front Line Defenders और HRCP ने इसे “न्यायिक उत्पीड़न” और असहमति दबाने की कार्रवाई बताया
- वकीलों ने तीन दिन की हड़ताल की
- कराची समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए
- ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो जूनियर ने सार्वजनिक रूप से समर्थन जताया
इमान की माँ शिरीन मज़ारी ने फैसले को “गैरकानूनी और असंवैधानिक” बताते हुए कहा कि बचाव पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।
प्रेग्नेंसी और जेल
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इमान मज़ारी गर्भवती हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंताएँ और बढ़ गई हैं। फिलहाल दोनों अदियाला जेल में बंद हैं।
बड़ा सवाल
यह मामला पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी, डिजिटल अधिकारों और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह केस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और ज़ोर पकड़ सकता है।
👉 अपील या आगे की सुनवाई की संभावना बनी हुई है।
