
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस बयान पर जोरदार पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी। होसबाले ने खरगे को इतिहास से सीखने की सलाह देते हुए कहा कि जिस संगठन को आज समाज ने स्वीकार कर लिया है, उस पर इस तरह का बयान देना सही नहीं है।
सिर्फ चाहने भर से बैन नहीं लगता’: होसबाले
दत्तात्रेय होसबाले ने साफ किया कि सिर्फ किसी के चाहने भर से किसी संगठन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “आज के समाज ने संघ को स्वीकार कर लिया है। ऐसे में इस तरह की बात करना गलत है।” यह टिप्पणी खरगे के उस बयान के जवाब में आई है, जहां उन्होंने कहा था कि यह उनकी निजी राय है कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, क्योंकि देश में ज्यादातर कानून-व्यवस्था की समस्याएं बीजेपी-आरएसएस की वजह से पैदा हो रही हैं।
खरगे का दावा: पटेल ने लगाया था प्रतिबंध
खरगे ने अपने बयान को सही ठहराने के लिए देश के पहले उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का हवाला दिया था। उन्होंने कहा था कि सरदार पटेल ने ही आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था।
- खरगे ने आरएसएस प्रमुख गोलवलकर को लिखे सरदार पटेल के पत्र का जिक्र किया था।
- उनके मुताबिक, उस पत्र में पटेल ने उल्लेख किया था कि गांधी जी की हत्या के बाद आरएसएस कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया और मिठाई बांटी।
- खरगे ने आरोप लगाया कि आरएसएस और हिंदू महासभा की गतिविधियों के कारण ही गांधी जी की हत्या हुई, जिसके परिणामस्वरूप आरएसएस पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था।
अखिलेश यादव के बयान के बाद दिया था खरगे ने बयान
गौरतलब है कि खरगे से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी आरएसएस पर बैन लगाने की मांग की थी। अखिलेश ने कहा था कि आज देश को ऐसे सरदार की जरूरत है जो उस विचारधारा पर फिर से प्रतिबंध लगाए जिससे बीजेपी का जन्म हुआ। अखिलेश के बयान पर पूछे जाने के बाद ही खरगे ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की अपनी निजी राय व्यक्त की थी।
यह पूरा मामला अब राजनीति में आरएसएस की ऐतिहासिक भूमिका और उस पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर रहा है।