
दोस्ती का रिश्ता जब ‘हैवानियत’ में बदल जाए, तो समाज के लिए वह खतरे की घंटी बन जाता है। कानपुर के गोविंद नगर में हुई राहुल अवस्थी की हत्या ने यह साबित कर दिया है कि कभी-कभी मामूली सी रकम और क्षणिक गुस्सा इंसान को जानवर बना देता है। ₹500 के उधार और एक गाली का बदला लेने के लिए एक शख्स ने अपने ही दोस्त को ऐसी मौत दी, जिसे सुनकर रूह काँप जाए।
साजिश के पीछे की ठंडी सोच
पुलिस की गिरफ्त में आए कामता शर्मा ने पूछताछ में जो बताया, वह किसी थ्रिलर फिल्म के विलेन जैसा है। राहुल से ₹500 मांगने पर जब उसे गालियां मिलीं, तो उसने माफी देने के बजाय मौत का रास्ता चुना। उसने अपने भतीजे मोहित के साथ मिलकर राहुल को मौत के जाल में फंसाया। उसे ‘दोस्ती की शराब’ के बहाने निराला नगर ग्राउंड ले जाया गया, जहाँ उसकी जिंदगी का आखिरी सफर तय होना था।
बर्बरता: “चोट नहीं लग रही थी, इसलिए कपड़े उतरवाए”
इस हत्याकांड का सबसे खौफनाक पहलू वह क्षण था जब आरोपियों ने राहुल को पीटना शुरू किया। राहुल ने ठंड से बचने के लिए जो जैकेट पहनी थी, वही उसकी पिटाई में बाधा बन रही थी। आरोपियों ने बेल्ट के वार को और घातक बनाने के लिए राहुल के कपड़े उतरवा दिए।
- जब राहुल अधमरा हो गया, तो आरोपियों ने ईंट उठाकर उसके चेहरे पर तब तक प्रहार किए जब तक वह पहचान में आने लायक नहीं बचा।
- साक्ष्य मिटाने के लिए शव को झाड़ियों में फेंका गया, जहाँ आवारा कुत्तों ने उसे क्षत-विक्षत कर दिया।
पुलिस की सक्रियता और ‘बिना पछतावे’ के कातिल
DCP साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने इस केस को चुनौती के तौर पर लिया और चार विशेष टीमें मैदान में उतारीं। सीसीटीवी फुटेज ने पुलिस को राहुल के पिता के कार्यस्थल (ऑयल डिपो) तक पहुँचाया, जहाँ आखिरी बार राहुल के साथ कामता को देखा गया था।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा: गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपियों से कड़ाई की, तो वे टूटे नहीं बल्कि उन्होंने बिना किसी शिकन के अपनी कहानी सुनाई। उनके चेहरे पर अपने दोस्त को खोने या हत्या करने का कोई अफसोस नहीं था।