

देश के प्रमुख हवाई अड्डे, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर गुरुवार और शुक्रवार को हुए ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) क्रैश के बाद अब इस घटना के पीछे की “लापरवाही” और भविष्य की चुनौतियों पर सवाल उठ रहे हैं। इस तकनीकी विफलता के कारण 800 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं और हवाई संचालन घंटों तक मैनुअल मोड पर चलता रहा।
घटना का मूल कारण: AMSS में गंभीर विफलता
तकनीकी खराबी का मुख्य कारण AMSS में आया। यह सिस्टम हवाई यातायात प्रबंधन (ATM) का डिजिटल आधार है, जो उड़ान योजनाओं और रडार डेटा के स्वचालित समन्वय को संभालता है। इसके ठप होते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स (ATC) को संदेशों और क्लीयरेंस के लिए मैनुअल और टेलीफोनिक कोऑर्डिनेशन का सहारा लेना पड़ा, जिससे ऑपरेशन धीमा हो गया और देरी का अंबार लग गया।
‘लापरवाही’ का खुलासा: महीनों पहले दी गई थी चेतावनी
इस पूरे संकट में सबसे बड़ी जानकारी यह सामने आई है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स गिल्ड (ATC Guild) ने इस विफलता से महीनों पहले, जुलाई 2025 में ही एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों को एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से चेतावनी दी थी।
- गिल्ड का दावा: पत्र में स्पष्ट रूप से ऑटोमेशन प्रणाली में प्रदर्शन में गिरावट (Performance Degradation) और डेटा देरी जैसी खामियों का उल्लेख किया गया था, खासकर दिल्ली जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर।
- सवाल: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पूर्व चेतावनी पर समय रहते ध्यान दिया जाता और सिस्टम अपग्रेड किया जाता, तो यह बड़ा संकट टल सकता था। यह घटना सिस्टम की ‘रिडंडेंसी’ (बैकअप व्यवस्था) में गंभीर कमी को दर्शाती है।
वर्तमान स्थिति और आगे की कार्रवाई
तकनीकी खराबी को तो ठीक कर लिया गया है और उड़ान संचालन अब सामान्य हो गया है, लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है।
- निर्देश: नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने अधिकारियों को तकनीकी समस्या के कारणों का विस्तृत विश्लेषण करने का निर्देश दिया है।
- फोकस: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त या बैकअप सर्वर सहित ATC संचालन को मजबूत करने पर ज़ोर दिया गया है, ताकि एक सिस्टम फेल होने पर दूसरा तुरंत कार्यभार संभाल सके।