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    Home»Current Affairs»कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु की याचिका से किसानों को जगी उम्मीद, 26.954 TMC पानी की मांग
    Current Affairs

    कावेरी जल विवाद: सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु की याचिका से किसानों को जगी उम्मीद, 26.954 TMC पानी की मांग

    News Box BharatBy News Box BharatAugust 10, 20263 Mins Read
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    तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों को अब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद है। राज्य सरकार ने कर्नाटक से कावेरी नदी का निर्धारित पानी जारी कराने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी मिला तो इस साल सांबा धान की खेती को बचाया जा सकता है।

    कर्नाटक से पानी नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तमिलनाडु

    कावेरी जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की ओर से पानी छोड़ने से जुड़े निर्देशों के बावजूद कर्नाटक ने अपेक्षित मात्रा में पानी जारी नहीं किया।

    तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट से 1 जून से 12 अगस्त के बीच बकाया 26.954 TMC पानी जारी कराने के लिए कर्नाटक को निर्देश देने की मांग की है।

    किसानों के सामने सांबा फसल बचाने की चुनौती

    कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए यह मामला सिर्फ राज्यों के बीच पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है। पानी की उपलब्धता सीधे खरीफ के बाद होने वाली सांबा धान की खेती से जुड़ी है।

    किसान नेताओं के मुताबिक अगर अगस्त के अंत तक पर्याप्त पानी मिल जाता है तो सीमित स्तर पर सांबा की खेती शुरू की जा सकती है। इसके बाद पूर्वोत्तर मानसून की बारिश भी फसल की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है।

    Mettur बांध के जलस्तर पर भी नजर

    किसानों के लिए मेट्टूर जलाशय का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। किसान संगठन के प्रतिनिधियों के अनुसार सिंचाई के लिए पानी छोड़ने से पहले जलाशय का स्तर करीब 100 फीट तक पहुंचना जरूरी माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल इसका स्तर लगभग 78 फीट बताया गया है।

    किसानों का कहना है कि अगर जून, जुलाई और अगस्त का बकाया पानी मिलता है तो सांबा फसल की संभावनाएं अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

    तमिलनाडु ने CWMA की निगरानी की भी मांग की

    तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण कर्नाटक के जलाशयों में पानी की स्थिति की नियमित निगरानी करे। राज्य चाहता है कि अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित बिलिगुंडलू में तय मात्रा के अनुसार पानी पहुंचने की निगरानी सुनिश्चित की जाए।

    तमिलनाडु ने अपनी याचिका में कर्नाटक के कावेरी बेसिन क्षेत्रों में हुई बारिश के आंकड़ों का भी उल्लेख किया है।

    किसानों ने मांगा सांबा फसल के लिए विशेष पैकेज

    कावेरी डेल्टा के किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण पहले ही कुरुवई फसल को नुकसान हुआ है। ऐसे में सांबा खेती के लिए राज्य सरकार को अलग से सहायता पैकेज घोषित करना चाहिए।

    किसानों के मुताबिक बीज, खेती की लागत और सिंचाई से जुड़ी मदद मिलने पर किसान बचे हुए मौसम में सांबा फसल की ओर लौट सकते हैं।

    अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकी नजर

    तमिलनाडु की याचिका के बाद कावेरी जल विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट की भूमिका अहम हो गई है। किसानों को उम्मीद है कि अदालत कर्नाटक को बकाया पानी छोड़ने के संबंध में स्पष्ट निर्देश देगी।

    फिलहाल कावेरी डेल्टा के किसानों की नजर इस बात पर है कि अदालत क्या आदेश देती है और कर्नाटक उस आदेश के बाद कितना पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ता है। समय पर पानी मिलना इस साल की सांबा खेती के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

    Cauvery Water Dispute Karnataka supreme court Tamil Nadu
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