

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ वीर सावरकर के कथित अपमान से जुड़े मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान पुणे की एमपी/एमएलए विशेष अदालत में एक बड़ा और अप्रत्याशित नाटकीय मोड़ आ गया।
गुरुवार को हुई सुनवाई में, शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर (सावरकर के परपौत्र) द्वारा मुख्य सबूत के तौर पर पेश की गई एक सीलबंद सीडी को जब अदालत में चलाया गया, तो वह पूरी तरह से खाली निकली। इस सीडी में राहुल गांधी के लंदन में दिए गए कथित आपत्तिजनक भाषण का वीडियो होने का दावा किया गया था।
सुनवाई के दौरान हुआ ड्रामा:
- शिकायतकर्ता के वकील संग्राम कोल्हटकर ने अदालत को याद दिलाया कि पहले संज्ञान लेते समय इसी सीडी को चलाया गया था और उसी के आधार पर राहुल गांधी को समन जारी किया गया था।
- सीडी के खाली निकलने पर, कोल्हटकर ने अदालत से यूट्यूब पर उपलब्ध भाषण को सीधे देखने की अनुमति मांगी।
- राहुल गांधी की ओर से पेश वकील मिलिंद दत्तात्रय पवार ने इसका कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि ऑनलाइन सामग्री अपने आप में प्रमाणित नहीं होती।
- मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे ने पवार की आपत्ति को स्वीकार करते हुए यूट्यूब लिंक देखने का अनुरोध खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यूआरएल को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत आवश्यक प्रमाणीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं है, इसलिए इसे सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आगे की कार्यवाही:
- इसके बाद, सत्यकी सावरकर की एक अतिरिक्त सीडी चलाने की याचिका को भी अदालत ने नामंजूर कर दिया, यह कहते हुए कि ऐसी कोई सीडी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है।
- सीडी के खाली होने के रहस्य की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए, कोल्हटकर ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया।
- अदालत ने इस मामले में आए नाटकीय मोड़ को देखते हुए सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी।
इस घटना ने मामले में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि जिस सीडी के आधार पर पहले राहुल गांधी को समन जारी किया गया था, वह आखिर अब खाली कैसे हो गई।
