
फरवरी 2026 में लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2025 के बीच सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के मौजूदा जजों के खिलाफ 8,600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं।
सबसे ज्यादा शिकायतें 2024 (1,170) और 2025 (1,102) में आईं, जबकि 2020 में सबसे कम 518 शिकायतें दर्ज हुईं। ये शिकायतें भ्रष्टाचार, आचरण, फैसलों में देरी और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़ी बताई गई हैं।
यह डेटा ऐसे समय सामने आया है जब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ के जिक्र पर विवाद हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अंश हटाने के निर्देश दिए।
शिकायतों की जांच न्यायपालिका के इन-हाउस मैकेनिज्म के तहत की जाती है। अब इस मुद्दे पर पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
