
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही अंदरूनी कलह अब बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदलती नजर आ रही है। पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने Nationalist Citizens Party of India (NCPI) में विलय करने का फैसला लिया है। साथ ही इन सांसदों ने केंद्र की NDA सरकार को समर्थन देने की घोषणा भी की है।
बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व बारासत से सांसद काकोली घोष दस्तिदार कर रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने अन्य सांसदों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।
काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि उनका समूह NCPI में विलय करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के साथ मिलकर काम करेगा। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।
दो-तिहाई से अधिक सांसद गुट के साथ
जानकारी के अनुसार, TMC के कुल 28-29 लोकसभा सांसदों में से 19 से 22 सांसद इस गुट के साथ बताए जा रहे हैं। यह संख्या दो-तिहाई से अधिक होने के कारण दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की संभावना कम मानी जा रही है।
प्रमुख बागी सांसदों में ये नाम शामिल
बागी गुट में काकोली घोष दस्तिदार, सुदिप बंद्योपाध्याय, सायोनी घोष, माला रॉय, यूसुफ पठान, सताब्दी रॉय और अरूप चक्रवर्ती समेत कई सांसदों के शामिल होने की चर्चा है।
NCPI में विलय क्यों?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सीधे किसी बड़े दल में शामिल होने के बजाय NCPI में विलय का रास्ता चुनने से सांसदों को कानूनी और राजनीतिक रूप से अधिक सुविधा मिल सकती है। यही वजह है कि इस रणनीति को एंटी-डिफेक्शन कानून से जुड़े पहलुओं के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
यदि यह विलय औपचारिक रूप से मान्य हो जाता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे TMC की स्थिति प्रभावित हो सकती है, वहीं NDA को संसद में अतिरिक्त मजबूती मिल सकती है।
क्या है अगला कदम?
अब सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और NCPI में प्रस्तावित विलय की औपचारिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर और स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
