

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए आज का दिन निराशाजनक रहा। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया PSLV-C62 मिशन तकनीकी खराबी के कारण अपने लक्ष्य को पाने में असफल रहा। इसरो का ‘वर्कहॉर्स’ कहा जाने वाला PSLV रॉकेट तीसरे चरण (Stage 3) में अनियंत्रित होकर अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया।
क्या हुआ मिशन के दौरान?
लॉन्च के शुरुआती दो चरण बिल्कुल सफल रहे थे, लेकिन तीसरे चरण (PS3) के अंत में रॉकेट की गति और दिशा में विसंगति (Anomaly) देखी गई। इस गड़बड़ी के कारण DRDO के महत्वपूर्ण ‘अन्वेषा’ (EOS-N1) सैटेलाइट सहित सभी 16 उपग्रह अपनी सही कक्षा (Orbit) में स्थापित नहीं हो सके और अंतरिक्ष में ही खो गए।
इसरो चीफ का बड़ा कदम
मिशन की विफलता पर दुख जताते हुए इसरो चीफ वी. नारायणन ने कहा कि तीसरे चरण में आए भटकाव के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए एक ‘विफलता विश्लेषण समिति’ (FAC) का गठन कर दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि डेटा के गहन विश्लेषण के बाद इसरो जल्द ही और अधिक मजबूती के साथ वापसी करेगा।
लगातार दूसरी विफलता
गौरतलब है कि PSLV-C61 के बाद यह लगातार दूसरा मौका है जब PSLV मिशन फेल हुआ है। यह असफलता भारत के आगामी स्पेस प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, जिस पर अब विशेषज्ञों की पैनी नजर है।
