
बेंगलुरु के एक BBA सेकंड ईयर के छात्र ने कॉलेज की तीन महीने की छुट्टियों में कुछ अलग करने का फैसला किया। पढ़ाई और आराम के बजाय उसने Rapido कैप्टन के तौर पर काम किया और करीब 8 से 8.5 घंटे रोज बाइक चलाकर कमाई की। इस दौरान उसने न सिर्फ पैसे कमाए, बल्कि गिग वर्क की असली चुनौतियों को भी करीब से समझा।
सुबह 8 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलाता था बाइक
छात्र के मुताबिक वह आमतौर पर सुबह करीब 8 बजे काम शुरू करता था और शाम 4:30 बजे तक ऑनलाइन रहता था। एक अच्छे दिन में उसकी ग्रॉस कमाई करीब ₹1,200 तक पहुंच जाती थी। हालांकि यह पूरी रकम उसकी बचत नहीं थी, क्योंकि पेट्रोल और बाइक से जुड़े दूसरे खर्च भी करने पड़ते थे।
उसने बताया कि पेट्रोल पर औसतन करीब ₹250-300 प्रतिदिन खर्च हो जाते थे। ऐसे में पेट्रोल निकालने के बाद उसके पास लगभग ₹1,000-1,050 बचते थे। उसने बाइक की depreciation, टायर और दूसरे खर्चों को अपनी कमाई से अलग से नहीं जोड़ा।
राइड नहीं मिली तो करने लगा फूड डिलीवरी
हर समय Rapido पर सवारी मिलना आसान नहीं था। खासकर दोपहर के समय जब राइड कम मिलती थीं, तब छात्र फूड डिलीवरी भी करता था।
हालांकि डिलीवरी में भी कई बार इंतजार करना पड़ता था। उसने बताया कि कुछ रेस्टोरेंट में ऑर्डर तुरंत मिल जाता था, जबकि कई बार खाना तैयार होने में 20 से 25 मिनट तक लग जाते थे। इस दौरान डिलीवरी पार्टनर का समय तो जाता है, लेकिन कमाई नहीं बढ़ती।
हर महीने एक जैसी नहीं रही कमाई
छात्र ने अपनी कमाई के आंकड़े भी शेयर किए। उसके मुताबिक:
- मई: 96 ऑर्डर, ₹5,650 कमाई
- जून: ₹16,660 कमाई
- जुलाई: 233 ऑर्डर, ₹14,222 कमाई
इन आंकड़ों से साफ है कि गिग वर्क में कमाई हर महीने एक जैसी नहीं रहती। ऑर्डर की संख्या, काम के घंटे, लोकेशन और डिमांड के हिसाब से आमदनी बदलती रहती है।
सिर्फ कमाई के लिए नहीं किया था काम
छात्र ने बताया कि उसका मकसद सिर्फ पैसे कमाना नहीं था। वह यह समझना चाहता था कि ऐप आधारित गिग वर्क वास्तव में कैसे चलता है और प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम काम को किस तरह प्रभावित करता है।
करीब तीन महीने काम करने के बाद उसे महसूस हुआ कि बाहर से आसान और flexible दिखने वाला यह काम काफी मेहनत मांगता है। लगातार बाइक चलाना, ऑर्डर का इंतजार करना, ट्रैफिक, ग्राहक से जुड़ी परेशानियां और पेट्रोल का खर्च—इन सबका असर कमाई पर पड़ता है।
छात्र ने बताई गिग वर्क की असली तस्वीर
छात्र का कहना है कि उसके लिए यह एक अच्छा side hustle था, क्योंकि वह इसे अपनी कॉलेज की छुट्टियों में कर रहा था और उसकी पूरी आजीविका इस कमाई पर निर्भर नहीं थी। लेकिन जिन लोगों के परिवार का खर्च पूरी तरह गिग वर्क की कमाई से चलता है, उनके लिए स्थिति काफी अलग और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
उसका अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कई लोगों ने उसकी मेहनत और अनुभव की तारीफ की। लोगों ने अपने गिग वर्क के अनुभव भी साझा किए। इस कहानी ने यह दिखाया कि कॉलेज की छुट्टियों में किया गया एक अस्थायी काम भी युवाओं को मेहनत, समय, कमाई और रोजगार की वास्तविकता को समझने का मौका दे सकता है।
बेंगलुरु के इस छात्र ने तीन महीने Rapido चलाकर करीब ₹35-40 हजार की कमाई की। लेकिन उसकी कहानी का असली पहलू कमाई से ज्यादा यह है कि उसने गिग इकॉनमी को एक कर्मचारी की नजर से समझने की कोशिश की।
