
अफ्रीका के हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में सुरक्षा हालात एक बार फिर गंभीर हो गए हैं। सोमालिया के प्रमुख शहर बाइडोआ में संघीय सेना और विपक्षी लड़ाकों के बीच सोमवार को भीषण संघर्ष हुआ। इसी बीच पाकिस्तान ने सोमालिया के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के साथ क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक भूमिका विस्तार देने के संकेत दिए हैं। दोनों घटनाक्रम अलग-अलग हैं, लेकिन इन्हें साथ देखने पर लाल सागर, अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर में बदलते सुरक्षा समीकरण की तस्वीर सामने आती है।
बाइडोआ में कई घंटे चली भीषण लड़ाई
रॉयटर्स के मुताबिक सोमालिया की संघीय सेना ने बाइडोआ शहर से विपक्षी लड़ाकों को पीछे धकेल दिया। लड़ाई में कई लोगों के मारे जाने की खबर है। स्थानीय लोगों के अनुसार शहर में सोमवार की झड़पें मार्च के बाद सबसे गंभीर थीं।
सोमालिया के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि संघीय सैनिकों पर तड़के विस्फोटकों से लदे वाहनों के जरिए हमला किया गया था। मंत्रालय के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में करीब 30 विपक्षी लड़ाके मारे गए। स्थानीय लोगों ने भी कई शव देखे जाने की बात कही। एक स्थानीय बुजुर्ग ने 10 लोगों के मारे जाने की जानकारी दी, जिनमें चार नागरिक और छह सैनिक शामिल थे।
विवाद सिर्फ सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं
बाइडोआ का संघर्ष सोमालिया की संघीय सरकार और क्षेत्रीय सत्ता के बीच लंबे समय से चल रहे राजनीतिक तनाव से जुड़ा है। पूर्व साउथ वेस्ट स्टेट राष्ट्रपति अब्दियाजिज हसन मोहम्मद लाफ्तागरीन के समर्थक संघीय सरकार के खिलाफ खड़े हैं।
मोगादिशु और क्षेत्रीय सरकारों के बीच चुनावों और संवैधानिक बदलावों को लेकर भी मतभेद हैं। क्षेत्रीय प्रशासन केंद्र सरकार के बढ़ते प्रभाव का विरोध कर रहे हैं। वहीं देश पहले से ही अल-शबाब के करीब दो दशक पुराने विद्रोह और गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है।
बाइडोआ में मानवीय संकट भी गहरा
बाइडोआ में पहले से ही संघर्ष और भूख से विस्थापित बड़ी आबादी रह रही है। रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई में मेडिसिन्स सैंस फ्रंटियर्स के सर्वे में विस्थापितों के ठिकानों पर रहने वाले करीब हर चार में से एक बच्चे में गंभीर कुपोषण पाया गया था।
ऐसे में शहर में नए सिरे से हुई लड़ाई से मानवीय स्थिति और खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
पाकिस्तान ने सोमालिया के साथ बढ़ाया रक्षा सहयोग
इसी क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच पाकिस्तान और सोमालिया ने 4 अगस्त को रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते में आतंकवाद विरोधी सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
पाकिस्तान पहले भी सोमालिया की सुरक्षा संस्थाओं को प्रशिक्षण और विशेषज्ञता देने की पेशकश कर चुका है। नए समझौते को इस मौजूदा सहयोग के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।
लाल सागर से पश्चिमी हिंद महासागर तक नजर
पाकिस्तान के लिए सोमालिया की रणनीतिक अहमियत केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। सोमालिया का भौगोलिक स्थान खाड़ी, लाल सागर, अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्र में है।
इसी वजह से पाकिस्तान की सोमालिया में बढ़ती रक्षा भागीदारी को उसके व्यापक क्षेत्रीय रणनीतिक विस्तार के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सऊदी अरब और तुर्की से भी बढ़ी नजदीकी
सोमालिया समझौते के कुछ ही दिन बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में भी हिस्सा लिया। इस समझौते में तीनों देशों ने किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी पर हमला मानने और सैन्य समन्वय बढ़ाने की बात कही है।
तुर्की की पहले से सोमालिया में महत्वपूर्ण सुरक्षा मौजूदगी है, जबकि सऊदी अरब लाल सागर और हॉर्न ऑफ अफ्रीका क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की इन दोनों देशों के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी उसे एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा नेटवर्क से जोड़ सकती है।
असिम मुनीर के दौर में पाकिस्तान की रणनीति
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असिम मुनीर की भूमिका भी इस बदलती रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के महीनों में सऊदी अरब और तुर्की के साथ पाकिस्तान की सैन्य और रणनीतिक बातचीत में उनकी सक्रियता दिखाई दी है।
Moneycontrol के विश्लेषण के अनुसार, सोमालिया के साथ समझौता और मक्का रक्षा समझौता इस बात का संकेत देते हैं कि पाकिस्तान अपने पारंपरिक क्षेत्र से बाहर रक्षा सहयोग के जरिए प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
लेकिन पाकिस्तान के सामने बड़ी चुनौती भी
इस रणनीति के सामने सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तान की अपनी आर्थिक स्थिति है। विदेशों में सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए सैनिकों, उपकरणों, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी।
पाकिस्तान के लिए रक्षा कूटनीति अपेक्षाकृत कम लागत में रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने का माध्यम हो सकती है, लेकिन अगर लंबे समय तक बड़े पैमाने पर सैन्य भूमिका निभानी पड़ी तो यह उसके सीमित संसाधनों पर दबाव डाल सकती है।
एक तरफ सोमालिया में संघर्ष, दूसरी तरफ नया सुरक्षा नेटवर्क
बाइडोआ में हुई ताजा लड़ाई यह दिखाती है कि सोमालिया अभी भी राजनीतिक और सैन्य अस्थिरता से जूझ रहा है। दूसरी ओर पाकिस्तान उसी क्षेत्र में रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसका मतलब यह नहीं है कि बाइडोआ की लड़ाई पाकिस्तान की वजह से हुई है। दोनों घटनाएं अलग-अलग घटनाक्रम हैं। लेकिन एक ही समय में सामने आए इन घटनाक्रमों से यह जरूर स्पष्ट होता है कि हॉर्न ऑफ अफ्रीका और पश्चिमी हिंद महासागर आने वाले समय में बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
बड़ी बातें
- बाइडोआ में सोमालिया की संघीय सेना और विपक्षी लड़ाकों के बीच भीषण संघर्ष हुआ।
- सोमालिया के रक्षा मंत्रालय ने करीब 30 विपक्षी लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया।
- स्थानीय लोगों ने कम से कम 10 मौतों की जानकारी दी।
- बाइडोआ पहले से विस्थापन और कुपोषण के गंभीर संकट से जूझ रहा है।
- पाकिस्तान ने 4 अगस्त को सोमालिया के साथ रक्षा सहयोग समझौता किया।
- पाकिस्तान ने इसके बाद सऊदी अरब और तुर्की के साथ मक्का रक्षा समझौते में भी हिस्सा लिया।
- पाकिस्तान की रणनीति लाल सागर, अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर तक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
- आर्थिक सीमाएं इस रणनीति के सामने बड़ी चुनौती हैं।
