
बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों में शामिल ‘ताल’ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा इन दिनों फिर चर्चा में है। फिल्म के निर्देशक सुभाष घई ने हाल ही में बताया कि जब उन्होंने ऐश्वर्या राय को इस फिल्म के लिए कास्ट किया था, तब उन्होंने अभिनेत्री से कहा था कि उन्हें उनकी मौजूदा ग्लैमरस इमेज को बदलना होगा।
घई के मुताबिक, ऐश्वर्या उस समय मिस वर्ल्ड रह चुकी थीं और उनकी पहचान काफी हद तक खूबसूरती और ग्लैमर से जुड़ी हुई थी। लेकिन निर्देशक ‘ताल’ में उन्हें एक अलग अंदाज में पेश करना चाहते थे।
ऐश्वर्या को देखकर सुभाष घई ने क्या सोचा?
सुभाष घई ने हालिया बातचीत में बताया कि ‘ताल’ के लिए अभिनेत्री की तलाश के दौरान उन्होंने कोरियोग्राफर सरोज खान से सलाह ली थी। जब ऐश्वर्या राय का नाम सामने आया, तब घई को लगा कि उनके सामने एक ऐसी अभिनेत्री है जिसकी पहचान पहले से ही ग्लैमर और कॉस्मेटिक दुनिया से जुड़ी हुई है।
लेकिन फिल्म में निभाए जाने वाले मानसी के किरदार के लिए वह उस छवि से बिल्कुल अलग प्रस्तुति चाहते थे।
‘मुझे तुम्हारी इमेज खत्म करनी होगी’
घई ने बताया कि उन्होंने ऐश्वर्या से साफ शब्दों में कहा था कि उन्हें किरदार के लिए उनकी मौजूदा इमेज को तोड़ना होगा।
उन्होंने ऐश्वर्या को फिल्म के शुरुआती हिस्से में बिना मेकअप नजर आने के लिए कहा। ऐश्वर्या ने भी इस बदलाव के लिए हामी भर दी और निर्देशक की मांग के अनुसार काम करने को तैयार हो गईं।
यहां ‘इमेज खत्म करने’ का मतलब ऐश्वर्या का करियर या लोकप्रियता खराब करना नहीं था। घई का मकसद उनके मुताबिक दर्शकों को अभिनेत्री के ग्लैमरस अवतार के बजाय किरदार और अभिनय पर ध्यान दिलाना था।
‘ताल’ में ऐश्वर्या का लुक क्यों था खास?
1999 में रिलीज हुई ‘ताल’ में ऐश्वर्या राय के साथ अनिल कपूर और अक्षय खन्ना मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म की कहानी, संगीत और विजुअल ट्रीटमेंट के साथ ऐश्वर्या का किरदार भी फिल्म की खास पहचान बना।
घई ने ऐश्वर्या को शुरुआती हिस्से में अपेक्षाकृत नेचुरल लुक में रखने का फैसला किया था, ताकि उनका किरदार कहानी के परिवेश से ज्यादा स्वाभाविक लगे।
बाद में फिल्म के गानों और दूसरे हिस्सों में उनका ग्लैमरस अंदाज भी देखने को मिला। यानी निर्देशक ने उनकी खूबसूरती को हटाया नहीं, बल्कि किरदार की जरूरत के हिसाब से उसके इस्तेमाल का तरीका बदला।
ऐश्वर्या के लिए ‘ताल’ क्यों बनी अहम फिल्म?
‘ताल’ ऐश्वर्या के करियर के शुरुआती दौर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने एक ऐसी युवती का किरदार निभाया जो संगीत और अपने सपनों के जरिए आगे बढ़ती है।
फिल्म की सफलता और उसके संगीत ने ऐश्वर्या को दर्शकों के बीच और मजबूत पहचान दिलाई। फिल्म में ए.आर. रहमान का संगीत भी बेहद लोकप्रिय हुआ।
सुभाष घई ने रिस्क क्यों लिया?
उस समय ऐश्वर्या एक बड़ी ब्यूटी आइकन के रूप में पहचानी जाती थीं। ऐसे में उन्हें बिना मेकअप और अपेक्षाकृत साधारण लुक में पेश करना एक तरह का रचनात्मक जोखिम था।
घई का मानना था कि निर्देशक को अभिनेता की पहले से बनी लोकप्रिय छवि के बजाय कहानी और किरदार की जरूरत के बारे में सोचना चाहिए। यही वजह थी कि उन्होंने ऐश्वर्या से उनके लुक को लेकर शुरुआत में ही स्पष्ट बात की।
27 साल बाद फिर क्यों चर्चा में आया यह किस्सा?
‘ताल’ को रिलीज हुए करीब 27 साल हो चुके हैं। फिल्म के निर्माण और कास्टिंग से जुड़ी घई की हालिया यादों ने उस दौर की कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है।
आज पीछे मुड़कर देखें तो ऐश्वर्या का ‘ताल’ वाला लुक उनके करियर के यादगार स्क्रीन अवतारों में गिना जाता है। खास बात यह है कि जिस ग्लैमरस इमेज को बदलने की बात घई कर रहे थे, उसी फिल्म ने ऐश्वर्या की स्टार पहचान को और मजबूत किया।
कहानी का असली मतलब
सुभाष घई का “तुम्हारी इमेज खत्म करनी होगी” वाला बयान पहली नजर में काफी चौंकाने वाला लगता है। लेकिन उनके पूरे बयान का संदर्भ देखें तो वह ऐश्वर्या की लोकप्रियता या करियर को नुकसान पहुंचाने की बात नहीं कर रहे थे।
उनका उद्देश्य था कि मिस वर्ल्ड और ग्लैमर आइकन वाली पहचान से बाहर निकलकर ऐश्वर्या दर्शकों के सामने ‘मानसी’ के रूप में दिखाई दें।
और दिलचस्प बात यही है कि ‘ताल’ के बाद ऐश्वर्या की पहचान सिर्फ खूबसूरती तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें एक अभिनेत्री के तौर पर भी व्यापक पहचान मिली।
