Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Buy SmartMag Now
    • Privacy & Policy
    • Terms & Conditions
    Facebook X (Twitter) Instagram
    News Box Bharat
    • Hindi News
    • News
      • Sport
      • Health
      • Videos
      • Technology
      • Entertainment
    • Sport
    • Videos
    • Politics
    • Latest
    • Business
    • Economy
    • World
    Subscribe
    News Box Bharat
    Home»Latest»मॉनसून सत्र में विपक्ष क्या वाकई सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हुआ?
    Latest

    मॉनसून सत्र में विपक्ष क्या वाकई सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हुआ?

    News Box BharatBy News Box BharatAugust 14, 20265 Mins Read
    मॉनसून सत्र में विपक्ष के विरोध और सरकार के विधायी एजेंडे के बीच संसद में लगातार गतिरोध देखने को मिला।
    Buy Ad Space

    संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हो गया, लेकिन इस बार की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ यह नहीं रही कि कितने विधेयक पास हुए। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष अपने मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने में सफल रहा या फिर हंगामे के बीच सरकार ने अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ा दिया?

    25 दिनों और 19 बैठकों वाले इस सत्र में लोकसभा की उत्पादकता करीब 19 फीसदी और राज्यसभा की करीब 39 फीसदी रही। सरकार और विपक्ष दोनों ने सत्र के लिए अलग-अलग तस्वीर पेश की।

    विपक्ष ने किन मुद्दों पर सरकार को घेरा?

    मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। इनमें छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई, परीक्षा और पेपर लीक से जुड़े सवाल, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोप और कुछ प्रस्तावित विधेयकों का विरोध प्रमुख रहा।

    छात्र प्रदर्शन पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार गृह मंत्री से जवाब की मांग करता रहा। संसद में इस मुद्दे पर चर्चा और जवाब की मांग को लेकर कई बार कार्यवाही बाधित हुई।

    विपक्ष की रणनीति का एक अहम हिस्सा यह भी रहा कि अलग-अलग दलों ने कई मुद्दों पर साथ आकर सरकार के खिलाफ दबाव बनाए रखा।

    FCRA बिल पर विपक्ष को मिली अहम सफलता?

    विपक्ष के लिए सबसे उल्लेखनीय घटनाक्रमों में FCRA संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजा जाना रहा।

    कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे थे और इसे वापस लेने की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से इसे सुरक्षा और विदेशी फंडिंग की निगरानी से जुड़ा कदम बताया गया। आखिरकार बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव आया।

    यही वह बिंदु है जिसे विपक्ष अपनी रणनीति की सफलता के तौर पर पेश कर रहा है।

    लेकिन सरकार भी पूरी तरह बैकफुट पर नहीं रही

    दूसरी तरफ तस्वीर का दूसरा हिस्सा भी है। संसद के इस सत्र में 12 विधेयक पास हुए। यानी लगातार हंगामे और विरोध के बावजूद सरकार अपना विधायी काम पूरी तरह रोकने के लिए मजबूर नहीं हुई।

    हालांकि इन 12 विधेयकों में से केवल एक विधेयक पर दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा हो पाई। बाकी कई विधेयक बिना पर्याप्त बहस के पारित हुए। यही बात इस सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक और संसदीय विडंबना बन गई।

    तो क्या विपक्ष सफल रहा?

    इस सवाल का जवाब पूरी तरह हां या ना में देना मुश्किल है।

    अगर विपक्ष की सफलता का पैमाना यह है कि उसने सरकार के कुछ महत्वपूर्ण एजेंडे को धीमा किया, FCRA जैसे मुद्दे पर सरकार को JPC का रास्ता अपनाने पर मजबूर किया और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों को संसद के केंद्र में बनाए रखा, तो विपक्ष को कुछ सफलता जरूर मिली।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सत्र के बाद विपक्ष की एकजुटता को बड़ी उपलब्धि बताते हुए ऐसे कई मुद्दे गिनाए जिन्हें उन्होंने सरकार की योजनाओं को रोकने या टालने में सफल बताया।

    लेकिन अगर सफलता का मतलब संसद में ज्यादा से ज्यादा बहस कराना और सरकार को विधायी काम करने से रोकना है, तो तस्वीर अलग है। सरकार ने 12 विधेयक पारित करा दिए और संसद की कार्यवाही का बड़ा हिस्सा हंगामे में चला गया।

    सबसे बड़ा नुकसान किसका हुआ?

    यहीं इस पूरे सत्र का सबसे महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है।

    विपक्ष कह सकता है कि उसने सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया। सरकार कह सकती है कि विपक्ष ने संसद को चलने नहीं दिया।

    लेकिन आंकड़े बताते हैं कि संसद में चर्चा का समय बेहद कम रहा। लोकसभा की 19 फीसदी और राज्यसभा की 39 फीसदी productivity इस बात का संकेत है कि राजनीतिक टकराव का सीधा असर संसदीय कामकाज पर पड़ा।

    यानी विपक्ष ने सरकार पर राजनीतिक दबाव जरूर बनाया, लेकिन इस प्रक्रिया में संसद के सामान्य कामकाज को भी भारी नुकसान हुआ।

    सरकार के लिए भी यह पूरी जीत नहीं

    सरकार के नजरिए से देखें तो 12 विधेयक पारित होना उपलब्धि है। लेकिन केवल बिल पास हो जाना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून बनाने के साथ बहस, सवाल और विपक्ष की आपत्तियों पर चर्चा भी महत्वपूर्ण है।

    जब 12 में से 11 विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित होने की बात सामने आती है, तो संसदीय प्रक्रिया की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    असली तस्वीर क्या है?

    मॉनसून सत्र को अगर राजनीतिक मुकाबले के रूप में देखें तो विपक्ष ने सरकार को लगातार रक्षात्मक स्थिति में रखने में कुछ हद तक सफलता हासिल की।

    लेकिन अगर इसे संसद के कामकाज की कसौटी पर देखें तो दोनों पक्षों के लिए यह बहुत सफल सत्र नहीं कहा जा सकता।

    विपक्ष अपने कई मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में लाने में सफल रहा, जबकि सरकार ने हंगामे के बावजूद अपने कई विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ा दिया। नतीजा यह रहा कि राजनीतिक रूप से दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर सकते हैं, लेकिन संसदीय बहस के लिहाज से सत्र की तस्वीर कमजोर रही।

    एक नजर में

    • मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ।
    • सत्र में 19 बैठकें हुईं।
    • लोकसभा की productivity करीब 19% रही।
    • राज्यसभा की productivity करीब 39% रही।
    • कुल 12 विधेयक पारित हुए।
    • केवल एक विधेयक पर दोनों सदनों में चर्चा हुई।
    • FCRA विधेयक को JPC के पास भेजना विपक्ष के लिए अहम उपलब्धि रहा।
    • छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा पूरे सत्र में छाया रहा।

    विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने में कुछ महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल करता दिखा, लेकिन इसे पूरी राजनीतिक जीत कहना जल्दबाजी होगी। दूसरी तरफ सरकार ने भी अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया, लेकिन कम बहस और कम productivity ने उसकी उपलब्धियों पर सवाल खड़े किए। असल में इस मॉनसून सत्र की सबसे बड़ी कहानी शायद विपक्ष बनाम सरकार की जीत से ज्यादा संसद में कम हुई बहस है।

    Monsoon Session 2026 Opposition
    Previous Articleस्वतंत्रता दिवस से पहले 1,057 जवानों और कर्मियों को सम्मान, 301 को मिला वीरता पदक
    Next Article सुभाष घई ने ऐश्वर्या राय से क्यों कहा था- ‘तुम्हारी इमेज खत्म कर दूंगा’? ‘ताल’ से जुड़ा पुराना किस्सा आया सामने

    Explore More

    November 3, 20262 Mins Read

    चांडिल डैम की बदलेगी तस्वीर! CM हेमंत सोरेन ने दिए बड़े निर्देश, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

    October 29, 20263 Mins Read

    अस्पतालों की मनमानी पर लगेगी लगाम? रांची में प्रशासन का सख्त आदेश, 7 दिन में लगानी होगी रेट लिस्ट

    October 27, 20265 Mins Read

    झारखंड में विकास योजनाओं की बौछार! 7,890 चापाकल से लेकर 500 बेड के अस्पताल तक मंजूरी

    Sponsored

    Fire-boltt Dhoni
    Latest Hindi News
    • चांडिल डैम की बदलेगी तस्वीर! CM हेमंत सोरेन ने दिए बड़े निर्देश, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर November 3, 2026
    • झारखंड के दो कुख्यात गैंगस्टरों पर इंटरपोल का शिकंजा, राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी November 2, 2026
    • रांची में पुलिस और राहुल दुबे गिरोह के बीच मुठभेड़, गोली लगने से एक अपराधी घायल, 5 गिरफ्तार October 30, 2026
    • अस्पतालों की मनमानी पर लगेगी लगाम? रांची में प्रशासन का सख्त आदेश, 7 दिन में लगानी होगी रेट लिस्ट October 29, 2026
    • झारखंड में विकास योजनाओं की बौछार! 7,890 चापाकल से लेकर 500 बेड के अस्पताल तक मंजूरी October 27, 2026
    • जन सुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर की मौत, अनगड़ा-मुरी रेलखंड के पास मिला शव October 27, 2026
    • दिव्यांग बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा, रांची में बनी रणनीति October 27, 2026
    • रांची में चोरों का दुस्साहस: सब-इंस्पेक्टर के बंद मकान में 20 लाख से अधिक की चोरी, CCTV में कैद हुए संदिग्ध October 27, 2026
    • झारखंड के उमराह यात्रियों की वतन वापसी के लिए तेज हुई पहल, इरफान अंसारी ने केंद्र से मांगी मदद October 26, 2026
    • रांची में 28 से 30 अक्टूबर तक बारिश की आशंका, चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर प्रशासन अलर्ट October 26, 2026
    Categories
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Privacy & Policy
    • Terms & Conditions
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.