
आराध्या बच्चन से जुड़े मानहानि मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कुछ अहम कानूनी सवाल सामने रखे हैं। मामला इंटरनेट पर आराध्या और बच्चन परिवार के बारे में कथित तौर पर झूठी और भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि किसी मशहूर परिवार के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा को क्या ट्रेडमार्क जैसी कानूनी सुरक्षा मिल सकती है और अगर मिलती है तो वह कितनी पीढ़ियों तक जाएगी।
मामला सिर्फ आराध्या तक सीमित है या पूरे परिवार तक?
आराध्या की ओर से यह मामला 2023 में उनके पिता अभिषेक बच्चन के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट में लाया गया था। याचिका में ऐसे ऑनलाइन वीडियो और सामग्री का जिक्र किया गया था, जिनमें आराध्या की सेहत को लेकर कथित रूप से झूठे दावे किए गए थे।
कुछ वीडियो में उनके गंभीर रूप से बीमार होने और अस्पताल में भर्ती होने की बात कही गई थी। एक वीडियो में तो उनकी मौत तक का दावा किए जाने की बात सामने आई थी। बच्चन परिवार ने ऐसी सामग्री को उनकी प्रतिष्ठा और निजता को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।
हाईकोर्ट ने उठाए तीन बड़े कानूनी सवाल
गुरुवार की सुनवाई में जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने मामले से जुड़े कई कानूनी पहलुओं पर सवाल रखे।
1. परिवार के नाम की प्रतिष्ठा कितनी पीढ़ियों तक?
कोर्ट ने सवाल किया कि अगर किसी परिवार का नाम अपनी प्रतिष्ठा के कारण ट्रेडमार्क जैसी पहचान रखता है, तो उस प्रतिष्ठा का कानूनी असर अगली पीढ़ियों तक कितना जा सकता है।
यानी सवाल यह है कि क्या बच्चन परिवार की सार्वजनिक पहचान और प्रतिष्ठा का फायदा या नुकसान परिवार के दूसरे सदस्यों की कानूनी सुरक्षा से भी जुड़ सकता है।
2. क्या Fake News भी Intellectual Property का मामला हो सकती है?
कोर्ट ने दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह रखा कि अगर किसी व्यक्ति के बारे में बेहद आपत्तिजनक और झूठी खबर फैलाई जाती है, तो क्या उसे Intellectual Property Rights यानी बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के रूप में भी देखा जा सकता है।
अगर ऐसा हो सकता है तो यह किस तरह के IP अधिकार के तहत आएगा, इस पर भी अदालत विचार करेगी।
3. मानहानि और IP Rights के बीच क्या संबंध है?
तीसरा सवाल मानहानि से जुड़ा है। कोर्ट यह देखना चाहता है कि Defamation यानी मानहानि को बौद्धिक संपदा अधिकारों के कानूनी ढांचे के साथ जोड़ा जा सकता है या नहीं।
अदालत ने साफ किया कि ये उसके सामने मौजूद सामान्य कानूनी सवाल हैं और सूची अंतिम नहीं है।
बच्चन परिवार की ओर से क्या दलील दी गई?
आराध्या की ओर से पेश हुए वकील प्रवीण आनंद ने दलील दी कि मामला सिर्फ एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक ऑनलाइन सामग्री में बच्चन परिवार के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करके आराध्या के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश की गई।
बचाव पक्ष की दलील का मुख्य आधार यह है कि ऐसे कंटेंट से परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और इसे सिर्फ सामान्य मानहानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
2023 में भी कोर्ट ने दी थी राहत
इस मामले में अप्रैल 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आराध्या के पक्ष में अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने संबंधित पक्षों को उनकी सेहत से जुड़ी भ्रामक सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से रोका था।
उस समय कोर्ट ने कहा था कि बच्चा सेलिब्रिटी का हो या आम परिवार का, हर बच्चे के साथ सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
अब मामले में बहस सिर्फ यह नहीं रह गई है कि आराध्या के बारे में झूठी जानकारी फैलाना गलत है या नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले के जरिए यह भी देख रहा है कि परिवार की प्रतिष्ठा, मानहानि, व्यक्तित्व अधिकार और बौद्धिक संपदा कानून एक-दूसरे से किस हद तक जुड़े हो सकते हैं।
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
क्यों अहम है यह मामला?
अगर अदालत इन सवालों पर कोई स्पष्ट कानूनी दृष्टिकोण तय करती है, तो इसका असर सिर्फ बच्चन परिवार तक सीमित नहीं रह सकता। मशहूर हस्तियों के नाम, परिवार की प्रतिष्ठा और इंटरनेट पर फैलने वाली झूठी सामग्री से जुड़े भविष्य के मामलों में भी इसका इस्तेमाल मिसाल के तौर पर हो सकता है।
