
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने रूस के सबसे बड़े तेल संयंत्रों में शामिल ओम्स्क ऑयल रिफाइनरी पर लंबी दूरी के ड्रोन से हमला कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह हमला यूक्रेन के नियंत्रित क्षेत्र से करीब 2700 किलोमीटर दूर पश्चिमी साइबेरिया में स्थित रिफाइनरी पर किया गया, जिसे अब तक के सबसे गहरे यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक माना जा रहा है।
इस हमले के बाद रूस के सबसे आधुनिक Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की भूमिका और उसकी वास्तविक क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, रूस ने आधिकारिक तौर पर यह स्वीकार नहीं किया है कि Su-57 इस मिशन में विफल रहा, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और यूक्रेनी स्रोतों में ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि लड़ाकू विमान सभी ड्रोन को रोकने में सफल नहीं हो पाया।
ओम्स्क ऑयल रिफाइनरी पर क्या हुआ?
6 जुलाई 2026 को यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन के जरिए रूस की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी पर हमला किया। रूस के ओम्स्क क्षेत्र के गवर्नर ने भी ड्रोन हमले की पुष्टि की और बताया कि एयर डिफेंस ने अधिकांश ड्रोन को मार गिराया, लेकिन कुछ ड्रोन रिफाइनरी तक पहुंच गए, जिससे वहां आग लग गई। बाद में नुकसान का आकलन शुरू किया गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले के बाद रिफाइनरी के संचालन पर असर पड़ा।
क्या Su-57 ड्रोन हमले को रोकने में असफल रहा?
यूक्रेनी मीडिया और कुछ ओपन-सोर्स विश्लेषकों ने दावा किया कि इस ऑपरेशन के दौरान रूस ने Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक लड़ाकू विमान को ड्रोन इंटरसेप्ट करने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो में दिख रहा विमान वास्तव में Su-57 ही था या उसने कितने ड्रोन गिराए। इसलिए “Su-57 पूरी तरह फेल रहा” जैसे दावों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
Su-57 क्यों है खास?
रूस का Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे अमेरिकी F-22 और F-35 के मुकाबले विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख खूबियां हैं:
- AESA रडार और आधुनिक सेंसर सिस्टम
- स्टील्थ डिजाइन
- सुपरसोनिक क्रूज़ क्षमता
- एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिशन की क्षमता
- लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता
हालांकि, रूस के पास अभी Su-57 की संख्या सीमित बताई जाती है और इन्हें बेहद अहम मिशनों में ही तैनात किया जाता है।
यूक्रेन की लंबी दूरी की ड्रोन क्षमता बनी बड़ी चुनौती
ओम्स्क पर हमला इस बात का संकेत है कि यूक्रेन अब हजारों किलोमीटर दूर स्थित रणनीतिक ऊर्जा ठिकानों तक भी ड्रोन पहुंचाने में सक्षम हो गया है। यह हमला रूस के ऊर्जा ढांचे और ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, ओम्स्क रूस की सबसे बड़ी रिफाइनरी है और इस पर हमला युद्ध का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
क्या रूस की एयर डिफेंस पर सवाल उठ रहे हैं?
रूस का कहना है कि उसकी एयर डिफेंस ने अधिकांश ड्रोन नष्ट कर दिए, लेकिन कुछ ड्रोन लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी के छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। यही कारण है कि इस हमले के बाद रूस की एयर डिफेंस व्यवस्था और Su-57 की प्रभावशीलता दोनों पर चर्चा तेज हो गई है।
यूक्रेन का ओम्स्क ऑयल रिफाइनरी पर हमला रूस के अंदर अब तक के सबसे लंबी दूरी वाले ड्रोन हमलों में से एक माना जा रहा है। इस घटना ने रूस की एयर डिफेंस तैयारियों और उसके अत्याधुनिक Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट की भूमिका पर बहस जरूर छेड़ दी है। हालांकि, Su-57 के पूरी तरह विफल होने या केवल एक ड्रोन गिराने जैसे दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से सामने आने वाली जानकारी इस घटना की पूरी तस्वीर साफ करेगी.
