
क्या हुआ सदन में?
संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका और इसी वजह से इसे मंजूरी नहीं मिल पाई।
वोटिंग में:
- पक्ष में: 298 वोट
- विरोध में: 230 वोट
- जरूरी बहुमत: लगभग 352 वोट
यानी सरकार आवश्यक संख्या तक नहीं पहुंच सकी और विधेयक गिर गया।
विधेयक क्यों था अहम?
यह बिल कई बड़े बदलावों से जुड़ा था:
- लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव
- महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को लागू करने की योजना
- 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन
इस वजह से इसे संसद के विस्तार और महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम माना जा रहा था।
इससे जुड़े अन्य विधेयकों पर भी ब्रेक
इस बिल के खारिज होते ही:
- परिसीमन विधेयक, 2026
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
इन पर आगे की कार्रवाई रोक दी गई।
सरकार का पक्ष
गृह मंत्री Amit Shah ने कहा:
- सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है
- लक्ष्य था कि 2029 लोकसभा चुनाव आरक्षण के साथ हों
- देश को उत्तर-दक्षिण के आधार पर नहीं बांटना चाहिए
- संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता
विपक्ष का कड़ा विरोध
विपक्षी दलों—कांग्रेस, DMK, तृणमूल कांग्रेस, बीजेडी—ने कई चिंताएं उठाईं:
- दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व पर असर
- जनसंख्या आधारित परिसीमन से असंतुलन
- संघीय ढांचे को खतरा
Rahul Gandhi समेत कई नेताओं ने इसे विपक्ष की बड़ी जीत बताया।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
- यह मौजूदा कार्यकाल में सरकार के लिए पहला बड़ा विधायी झटका माना जा रहा है
- एनडीए गठबंधन संख्या बल साबित नहीं कर पाया
- अब सरकार को:
- या तो संशोधन कर फिर से बिल लाना होगा
- या नई रणनीति के साथ समर्थन जुटाना होगा
