

देश में स्टार्टअप्स के बढ़ते प्रभुत्व और नए अवसरों के कारण MBA की पारंपरिक चमक हुई फीकी।
जाने-माने स्टार्टअप फाउंडर ने हाल ही में Zerodha के सह-संस्थापक निखिल कामथ के उस विचार का समर्थन किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि आज के दौर में MBA की प्रासंगिकता कम होती जा रही है। फाउंडर का मानना है कि “अब भी McKinsey (या अन्य बड़ी कंसल्टिंग फर्म) के सपने सिर्फ मूर्ख ही देखते हैं।” यह टिप्पणी भारत में व्यावसायिक शिक्षा और करियर के अवसरों के बदलते परिदृश्य को दर्शाती है।
उनके अनुसार, 2025 के भारत में समीकरण पूरी तरह से बदल गया है। गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे शहरों में स्टार्टअप्स का तेज़ी से फलना-फूलना, टियर-2 शहरों में स्थानीय ब्रांडों का उदय, और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का लगातार विस्तार, इन सबने मिलकर महत्वाकांक्षी पेशेवरों के लिए अवसरों की एक विस्तृत श्रृंखला खोल दी है।
जानकारी के मुताबिक, इन नई विकास गाथाओं के कारण अब उच्च शिक्षा के पारंपरिक मार्गों से इतर भी करियर बनाने के कई रास्ते खुल गए हैं। सूत्रों ने बताया कि पहले जहां MBA को सफल करियर की गारंटी माना जाता था, वहीं अब युवा पेशेवर इन नए और गतिशील क्षेत्रों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
