

चाईबासा की दर्दनाक कहानी: खून के प्यासे मासूमों को ज़िंदगी देने चला अस्पताल, दे गया लाइलाज घाव!
चाईबासा (झारखंड): पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के चाईबासा सदर अस्पताल से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे को हिलाकर रख दिया है। थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे पाँच मासूम बच्चों को ब्लड बैंक की घोर लापरवाही के कारण HIV संक्रमित खून चढ़ा दिया गया। यह घटना चिकित्सा जगत में आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) का एक बड़ा उदाहरण बन गई है।
क्या है यह हृदय विदारक मामला?
थैलेसीमिया से पीड़ित इन बच्चों को ज़िंदा रहने के लिए नियमित रूप से खून की ज़रूरत होती है। इसी क्रम में, चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में इन बच्चों को खून चढ़ाया गया। लेकिन यह ‘जीवनदान’ इनके लिए लाइलाज अभिशाप बन गया।
- शुरुआत: 13 सितंबर, 2025 को एक 7 वर्षीय बच्चे को खून चढ़ाया गया। 18 अक्टूबर को जब फॉलो-अप टेस्ट हुआ, तो वह बच्चा HIV पॉज़िटिव पाया गया।
- चौंकाने वाला खुलासा: शनिवार (25 अक्टूबर 2025) को जाँच का दायरा बढ़ा, तो पता चला कि कुल पाँच बच्चे इस खतरनाक संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं।
यह साफ़ तौर पर बताता है कि ब्लड बैंक में खून की स्क्रीनिंग (Screening) या जाँच ठीक से नहीं की गई, जिसकी कीमत अब इन बच्चों को अपनी मासूम ज़िंदगी से चुकानी पड़ेगी।
सरकार और न्यायपालिका का दखल
यह खबर सामने आते ही हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तुरंत सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद सिविल सर्जन समेत कई अधिकारियों को तत्काल निलंबित (Suspended) कर दिया गया है और विभागीय जाँच शुरू कर दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है और राज्य सरकार से इस गंभीर चूक पर जवाब माँगा है। राँची से 5 सदस्यीय मेडिकल टीम भी चाईबासा पहुँचकर ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली में हुई अनियमितताओं की गहन जाँच कर रही है।
संक्रमित बच्चों के लिए सहारा
सरकार ने वादा किया है कि संक्रमित बच्चों का पूरा इलाज सरकारी खर्चे पर किया जाएगा। दुःख में डूबे परिवारों ने ज़िला प्रशासन और सरकार से केवल एक ही गुहार लगाई है—इंसाफ़ की गुहार!
यह घटना उन सभी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के मन में डर पैदा करती है, जो नियमित तौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूज़न (Blood Transfusion) पर निर्भर हैं। अब यह जाँच का विषय है कि यह सिर्फ़ एक गलती थी, या ब्लड बैंक में सुरक्षा मानकों (Safety Standards) की अनदेखी का एक बड़ा, ख़तरनाक पैटर्न चल रहा था।