
ईरान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य दबाव के बाद अब बड़े पैमाने पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग करने की रणनीति अपनाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो देश ईरान को आर्थिक मदद या किसी तरह की “लाइफलाइन” देंगे, उन्हें भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
चीन ने आर्थिक दबाव की रणनीति पर उठाए सवाल
चीन ने लगातार ईरान संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति से निकालने की वकालत की है। बीजिंग का कहना है कि दबाव और टकराव बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। चीन पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि बल प्रयोग और धमकी की नीति के बजाय संवाद और बातचीत ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है।
चीन की यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करने की तैयारी में है।
ट्रंप ने किया ‘Economic Warfare’ का ऐलान
ट्रंप ने 20 अगस्त को ईरान के खिलाफ एक नई आर्थिक मुहिम की घोषणा की। उन्होंने इसे अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक दबाव बताया और कहा कि ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे।
अमेरिका की रणनीति में ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय लेनदेन और उन नेटवर्क को निशाना बनाना शामिल हो सकता है, जिनके जरिए तेहरान को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था से जुड़ने में मदद मिलती है।
चीन के लिए भी बढ़ सकती है चुनौती
इस मामले में चीन की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ईरान के साथ बड़े व्यापारिक और ऊर्जा संबंध रखता है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाली चीनी कंपनियों या वित्तीय संस्थानों पर भी दबाव बढ़ाता है, तो इसका असर सीधे अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है।
अमेरिका पहले भी ईरानी तेल से जुड़े चीनी कारोबार पर प्रतिबंध लगा चुका है। ऐसे कदमों ने दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक तनाव को बढ़ाया है।
चीन लगातार बातचीत पर दे रहा है जोर
चीन का कहना है कि ईरान संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई या आर्थिक दबाव से नहीं बल्कि राजनीतिक बातचीत से होना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि संघर्ष ने क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक विकास, सप्लाई चेन और ऊर्जा आपूर्ति को भी नुकसान पहुंचाया है।
बीजिंग ने युद्धविराम को मजबूत करने, बातचीत फिर शुरू करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौवहन को सामान्य करने की भी अपील की है।
होर्मुज संकट से दुनिया की चिंता बढ़ी
ईरान संकट का सबसे बड़ा वैश्विक असर ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है और यहां तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। 20 अगस्त को कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थीं।
अगर संकट लंबा खिंचता है तो तेल, गैस, शिपिंग और वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका असर और बढ़ सकता है।
अमेरिका-चीन टकराव का नया मोर्चा?
ईरान को लेकर अमेरिका की नई आर्थिक रणनीति अब सिर्फ वॉशिंगटन और तेहरान के बीच का मुद्दा नहीं रह गई है। अगर चीन ईरान के साथ अपने व्यापारिक और ऊर्जा संबंध जारी रखता है और अमेरिका उस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है, तो दोनों महाशक्तियों के बीच नया आर्थिक टकराव पैदा हो सकता है।
चीन फिलहाल बातचीत, तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है।
मुख्य बातें
- ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नई आर्थिक मुहिम का ऐलान किया।
- अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना चाहता है।
- चीन ने बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।
- चीन और ईरान के बीच मजबूत व्यापारिक और ऊर्जा संबंध हैं।
- होर्मुज में तनाव से वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हो रहा है।
- अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा चीन तक बढ़ने पर वॉशिंगटन-बीजिंग तनाव बढ़ सकता है।
ईरान संकट अब केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं है। अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, जबकि चीन बातचीत और कूटनीति को समाधान का रास्ता बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका की नई आर्थिक रणनीति ईरान पर कितना असर डालती है और चीन इस दबाव का किस तरह जवाब देता है।
