
जैवलिन थ्रो में 90 मीटर का आंकड़ा पार करना दुनिया के चुनिंदा एथलीटों के लिए ही संभव हुआ है। भारत के Neeraj Chopra ने 2025 में 90.23 मीटर का थ्रो करके इस एलीट क्लब में जगह बनाई, लेकिन ऑल-टाइम रिकॉर्ड की बात करें तो चेक गणराज्य के जान ज़ेलेज़्नी आज भी सबसे आगे हैं। उनका 98.48 मीटर का थ्रो 25 मई 1996 से पुरुषों के जैवलिन का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना हुआ है।
98 मीटर के पार पहुंचने वाले अकेले खिलाड़ी
जान ज़ेलेज़्नी ने 1996 में जर्मनी के जेना में 98.48 मीटर भाला फेंककर इतिहास रच दिया था। खास बात यह है कि इसके करीब पहुंचने वाले जर्मनी के जोहान्स वेटर भी 97.76 मीटर तक ही जा सके। वेटर का यह प्रदर्शन 2020 में आया था और वह आज भी ऑल-टाइम लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं।
दुनिया के सबसे लंबे 10 जैवलिन थ्रो
मौजूदा जैवलिन मॉडल के रिकॉर्ड के आधार पर टॉप-10 में ये प्रदर्शन शामिल हैं:
| रैंक | खिलाड़ी | देश | थ्रो |
|---|---|---|---|
| 1 | जान ज़ेलेज़्नी | चेक गणराज्य | 98.48 मीटर |
| 2 | जोहान्स वेटर | जर्मनी | 97.76 मीटर |
| 3 | थॉमस रोहलर | जर्मनी | 93.90 मीटर |
| 4 | अकी पारवियानेन | फिनलैंड | 93.09 मीटर |
| 5 | एंडरसन पीटर्स | ग्रेनेडा | 93.07 मीटर |
| 6 | जूलियस येगो | केन्या | 92.72 मीटर |
| 7 | सर्गेई मकारोव | रूस | 92.61 मीटर |
| 8 | रेमंड हेच्ट | जर्मनी | 92.60 मीटर |
| 9 | एंड्रियास हॉफमैन | जर्मनी | 92.06 मीटर |
| 10 | कोन्स्टान्टिनोस गैट्सियूडिस | ग्रीस | 91.69 मीटर |
नीरज चोपड़ा इस लिस्ट में कहां हैं?
नीरज चोपड़ा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 90.23 मीटर है, जो उन्होंने मई 2025 में दोहा डायमंड लीग में हासिल किया था। वह 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले भारत के पहले पुरुष जैवलिन थ्रोअर बने।
हालांकि 90.23 मीटर का प्रदर्शन उन्हें इस खास टॉप-10 सूची में जगह नहीं दिलाता। उपलब्ध ऑल-टाइम आंकड़ों में नीरज का 90.23 मीटर प्रदर्शन 24वें स्थान के आसपास है।
लेकिन यह आंकड़ा भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि इससे पहले किसी भारतीय पुरुष खिलाड़ी ने आधिकारिक मुकाबले में 90 मीटर की दूरी पार नहीं की थी।
अरशद नदीम नीरज से आगे
पाकिस्तान के Arshad Nadeem ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 92.97 मीटर का थ्रो किया था। यह न सिर्फ उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था, बल्कि ओलंपिक रिकॉर्ड भी बना। इस प्रदर्शन ने उन्हें ऑल-टाइम लिस्ट में नीरज से काफी ऊपर पहुंचा दिया।
क्यों खास है 90 मीटर का क्लब?
जैवलिन थ्रो में 90 मीटर पार करना बेहद दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है। 2026 तक पुरुषों के जैवलिन में सिर्फ 26 एथलीट इस दूरी को पार कर पाए हैं।
यानी नीरज का 90.23 मीटर थ्रो सिर्फ एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि उन्हें दुनिया के सबसे विशिष्ट जैवलिन थ्रोअर्स के क्लब में शामिल करने वाला प्रदर्शन था।
30 साल बाद भी क्यों नहीं टूटा रिकॉर्ड?
ज़ेलेज़्नी का 98.48 मीटर का रिकॉर्ड इसलिए भी असाधारण है क्योंकि पुरुषों के जैवलिन में 90 मीटर से ऊपर थ्रो करना ही बेहद कठिन है। 2020 में वेटर ने 97.76 मीटर के साथ रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचकर उम्मीद जगाई थी, लेकिन वह भी 98 मीटर की सीमा पार नहीं कर सके।
इसके अलावा जैवलिन की तकनीक और नियमों में बदलावों ने भी पुराने रिकॉर्डों को अलग संदर्भ दिया है। मौजूदा मॉडल के जैवलिन के साथ ज़ेलेज़्नी का रिकॉर्ड अब भी सबसे ऊंचा है।
नीरज के लिए अगली चुनौती क्या?
नीरज अब 90 मीटर के क्लब में पहुंच चुके हैं। उनके सामने अगला बड़ा लक्ष्य अपने 90.23 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ को और बेहतर करना है।
2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि श्रीलंका के रुमेश थरंगा ने 89.75 मीटर के साथ गोल्ड हासिल किया।
यानी नीरज के सामने सिर्फ इतिहास के रिकॉर्ड नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो 90 मीटर के आसपास लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
जैवलिन थ्रो की ऑल-टाइम लिस्ट में जान ज़ेलेज़्नी का 98.48 मीटर का रिकॉर्ड आज भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। उनके बाद जोहान्स वेटर 97.76 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि नीरज चोपड़ा ने 90 मीटर की बाधा पार कर ली है। हालांकि रिकॉर्ड से अभी काफी दूरी है, लेकिन नीरज की कहानी बताती है कि भारतीय जैवलिन अब दुनिया के सबसे बड़े मंच पर मजबूती से मौजूद है।
