
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की नई दिल्ली से हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक और कूटनीतिक विवाद गहरा गया है। ढाका सरकार ने इस कार्यक्रम पर कड़ी आपत्ति जताई है और भारत से नाराज़गी जाहिर की है। वहीं, भारत ने साफ किया है कि यह कार्यक्रम किसी सरकारी एजेंसी का नहीं था और इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं थी।
शेख़ हसीना ने क्या कहा?
नई दिल्ली में आयोजित मीडिया संवाद में शेख़ हसीना ने अपनी पार्टी आवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक हैं और उन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की इच्छा भी जताई। उन्होंने मौजूदा सरकार पर अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
बांग्लादेश सरकार क्यों नाराज़?
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस को अपनी संप्रभुता के प्रति असम्मान बताया। सरकार का कहना है कि भारत में रह रही शेख़ हसीना को इस तरह सार्वजनिक मंच उपलब्ध कराना दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। ढाका ने भारत से पहले भी इस कार्यक्रम को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया था।
भारत का जवाब
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कार्यक्रम एक निजी संस्था द्वारा आयोजित किया गया था और भारत सरकार का इससे कोई संबंध नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन को आधिकारिक समर्थन प्राप्त नहीं था।
बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन
शेख़ हसीना के संबोधन के बाद ढाका समेत कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने उनका पुतला जलाया और भारत के रुख की भी आलोचना की। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
पृष्ठभूमि
अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख़ हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी और वह भारत आ गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश में नई सरकार बनी, जिसने उनके खिलाफ कई मामलों में कार्रवाई शुरू की। भारत अब तक उनके प्रत्यर्पण के अनुरोध पर कोई अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है।
