
शारदा सिन्हा की आवाज में लोकसंगीत की मिठास और बॉलीवुड की कहानी
शारदा सिन्हा को बिहार और पूर्वी भारत के लोकसंगीत की सबसे अलग और लोकप्रिय आवाजों में गिना जाता है। मैथिली, भोजपुरी और मगही लोकगीतों को अपनी आवाज देने वाली शारदा सिन्हा ने जब बॉलीवुड का रुख किया तो उनकी आवाज का वही देसीपन फिल्मों में भी सुनाई दिया। उनकी आवाज में रिकॉर्ड हुआ गाना ‘कहे तोसे सजना’ आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार गीतों में शामिल है।
यह गाना 1989 में रिलीज हुई सलमान खान और भाग्यश्री की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का हिस्सा था। फिल्म के संगीतकार रामलक्ष्मण थे और गीत को शारदा सिन्हा की आवाज ने एक खास लोक रंग दिया।
कैसे शारदा सिन्हा तक पहुंचा बॉलीवुड का ऑफर?
शारदा सिन्हा को ‘मैंने प्यार किया’ में गाने का मौका अचानक मिला था। एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि फिल्म के निर्माता परिवार से जुड़े ताराचंद बड़जात्या ने उनकी आवाज सुनी थी और उनके लोकगीतों से प्रभावित हुए थे।
उस समय शारदा सिन्हा मुंबई में एक भोजपुरी फिल्म के लिए रिकॉर्डिंग कर रही थीं। उनके लोकगीतों की रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें ‘मैंने प्यार किया’ के लिए गाने का मौका मिला। इस तरह लोकसंगीत की दुनिया की एक स्थापित आवाज हिंदी सिनेमा के बड़े पर्दे तक पहुंची।
‘कहे तोसे सजना’ क्यों बना इतना खास?
‘कहे तोसे सजना’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी और लोकसंगीत की खुशबू थी। उस दौर के मुख्यधारा के बॉलीवुड संगीत के बीच शारदा सिन्हा की आवाज ने गीत को अलग पहचान दी।
फिल्म में यह गीत सलमान खान और भाग्यश्री पर फिल्माया गया था। शारदा सिन्हा की आवाज ने गीत के भाव को सहज और घरेलू अंदाज दिया, जिससे यह गाना फिल्म की कहानी का एक यादगार हिस्सा बन गया।
शारदा सिन्हा और ‘कहे तोसे सजना’ से जुड़ी खास बातें
- गाना फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में शामिल था।
- फिल्म 1989 में रिलीज हुई थी।
- इसे शारदा सिन्हा ने अपनी आवाज दी थी।
- संगीतकार रामलक्ष्मण थे।
- गाने को सलमान खान और भाग्यश्री पर फिल्माया गया था।
- शारदा सिन्हा की लोकगायिकी ने गीत को अलग पहचान दी।
सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं था शारदा सिन्हा का सफर
शारदा सिन्हा की पहचान केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं रही। उन्होंने मैथिली, भोजपुरी और मगही लोकगीतों को देशभर में लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। खासकर छठ के गीतों में उनकी आवाज घर-घर तक पहुंची।
बॉलीवुड में भी उन्होंने बाद में ‘हम आपके हैं कौन’ का लोकप्रिय गीत ‘बाबुल’ गाया। इस तरह उनका फिल्मी सफर भले सीमित रहा, लेकिन जिन गीतों में उनकी आवाज आई, उनमें उनकी अपनी लोक पहचान साफ सुनाई दी।
शारदा सिन्हा की आवाज क्यों आज भी याद आती है?
शारदा सिन्हा की गायकी की खासियत यह थी कि उनकी आवाज में बनावटीपन नहीं था। लोकगीतों की सहजता, मिट्टी की खुशबू और भावनाओं की सीधी अभिव्यक्ति उनकी गायकी की पहचान रही।
यही वजह है कि ‘कहे तोसे सजना’ जैसे गीत को सुनने पर सिर्फ फिल्म का दृश्य याद नहीं आता, बल्कि शारदा सिन्हा की अपनी सांस्कृतिक पहचान भी सामने आती है।
उनके निधन के बाद भी उनके गीत लगातार सुने जा रहे हैं। ‘कहे तोसे सजना’ आज भी डिजिटल म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और शारदा सिन्हा की लोकप्रिय रिकॉर्डिंग्स में शामिल है।
शारदा सिन्हा ने बॉलीवुड में बड़ी संख्या में गाने नहीं गाए, लेकिन उनकी आवाज ने जो छाप छोड़ी, वह बेहद खास रही। ‘कहे तोसे सजना’ इस बात का उदाहरण है कि लोकसंगीत की अपनी मिट्टी से निकली आवाज जब मुख्यधारा के सिनेमा तक पहुंचती है तो वह समय के साथ और भी यादगार हो सकती है।
शारदा सिन्हा की आवाज में यह गीत आज भी उनके संगीत सफर और भारतीय लोकसंस्कृति से उनके गहरे जुड़ाव की याद दिलाता है।
