
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के फाउंडर एवं चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्रा और कंपनी के एमडी एवं सीईओ पुनीत गोयनका के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। 31 जुलाई 2026 को जारी आदेश में दोनों को एक साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा कुल ₹1.48 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं, ZEEL को भी दो महीने के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से बैन किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
SEBI की जांच के अनुसार मामला हैदराबाद स्थित ZEEL की एक प्रॉपर्टी से जुड़ा है। आरोप है कि 2018 में कंपनी की इस संपत्ति के मूल टाइटल डीड्स को बिना आवश्यक मंजूरी के गिरवी रखकर प्रमोटर समूह से जुड़ी निजी कंपनियों द्वारा लिए गए करीब ₹726 करोड़ के लोन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा (Collateral) के रूप में इस्तेमाल किया गया।
जांच में सामने आया कि यह संपत्ति ZEEL की थी, लेकिन इसका उपयोग प्रमोटर परिवार से जुड़ी कंपनियों के हित में किया गया।
SEBI ने क्या पाया?
SEBI के आदेश के मुताबिक—
- बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स से पहले मंजूरी नहीं ली गई।
- ऑडिट कमेटी और शेयरधारकों की अनुमति भी नहीं ली गई।
- यह एक Related Party Transaction था, जिसका आवश्यक खुलासा नहीं किया गया।
- सुभाष चंद्रा ने कंपनी की ओर से ऐसी घोषणा की, जिसमें प्रबंधन की मंजूरी होने का दावा किया गया, जबकि जांच में यह सही नहीं पाया गया।
- नियामक का कहना है कि कंपनी की महत्वपूर्ण संपत्ति को प्रमोटर समूह के निजी हित में जोखिम में डाला गया।
Deloitte की रिपोर्ट से खुला मामला
मामले की शुरुआत FY2018-19 की ऑडिट के दौरान हुई, जब Deloitte Haskins & Sells LLP ने पाया कि हैदराबाद प्रॉपर्टी के मूल टाइटल डीड्स उपलब्ध नहीं हैं। बाद में इन्हें “दस्तावेज गुम होने” का मामला बताया गया, जबकि जांच में सामने आया कि दस्तावेज लेंडर के पास गिरवी रखे गए थे और जून 2020 तक वहीं रहे।
किस पर कितना जुर्माना?
SEBI ने आदेश में कुल ₹1.48 करोड़ का जुर्माना लगाया है।
- सुभाष चंद्रा – ₹60 लाख
- पुनीत गोयनका – ₹58 लाख
- ZEEL – ₹30 लाख
सभी को 45 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है।
SEBI का क्या कहना है?
SEBI ने अपने लगभग 150 पेज के आदेश में कहा कि यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और लिस्टिंग नियमों (LODR) के उल्लंघन से जुड़ा है। नियामक के अनुसार, कंपनी प्रबंधन शेयरधारकों के हितों की रक्षा करने में विफल रहा और आवश्यक सावधानी (Due Diligence) नहीं बरती गई।
यह कार्रवाई क्यों अहम है?
ZEEL और Essel Group पहले भी कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मामलों में नियामकीय जांच का सामना कर चुके हैं। ऐसे में SEBI की यह ताजा कार्रवाई निवेशकों के हितों की सुरक्षा और सूचीबद्ध कंपनियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
