
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन कर रहे वांगचुक की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, लेकिन सरकार अब तक मौन है।
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 19वां दिन है और उनकी स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस आंदोलन को नजरअंदाज कर रही है और विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
राज ठाकरे ने क्या कहा?
राज ठाकरे ने अपने बयान में कहा कि एक समय भारतीय जनता पार्टी सोनम वांगचुक का सम्मान करती थी और उन्हें 2018 में एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में आमंत्रित भी किया गया था। लेकिन आज जब वह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े NEET विवाद में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, तब सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं दिख रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के छात्रों और अभिभावकों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक विषय है।
सरकार पर साधा निशाना
राज ठाकरे ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब छात्रों के भविष्य का सवाल है, तब सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के ऐसे मुद्दों पर भी गंभीरता नहीं दिखा रही है।
सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति
16 जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अनशन के 19 दिनों में सोनम वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है।
डॉक्टरों के अनुसार:
- ब्लड शुगर: 80 mg/dL
- पल्स: 72 प्रति मिनट
- ब्लड प्रेशर: 105/61 mmHg (लेटने की स्थिति में)
- लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण शरीर की मांसपेशियां टूट रही हैं, जिससे यूरिक एसिड बढ़ने और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है।
क्यों कर रहे हैं अनशन?
सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक, NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार शामिल हैं।
इस आंदोलन को कई शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन भी मिल चुका है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
अब तक केंद्र सरकार की ओर से सोनम वांगचुक के साथ किसी औपचारिक बातचीत या समाधान की घोषणा नहीं की गई है। वहीं, MNS ने साफ कर दिया है कि वह सोनम वांगचुक और उनकी मांगों के समर्थन में मजबूती से खड़ी है।
