
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों (स्ट्रे डॉग्स) से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स को हटाने संबंधी Animal Welfare Board of India (AWBI) की SOP (Standard Operating Procedure) पर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
मुख्य फैसले की बातें:
- सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के अपने पिछले आदेश और AWBI की SOP में कोई बदलाव करने से इनकार कर दिया।
- कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य का अधिकार (Right to Life) सबसे ऊपर है। कुत्तों के काटने की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और अन्य संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाएगा।
- कुत्तों को नसबंदी (Sterilization) और टीकाकरण (Vaccination) के बाद निर्धारित शेल्टर्स में रखा जाएगा। उन्हें मूल जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा।
- आक्रामक या रेबीज से प्रभावित कुत्तों के मामले में ईथनेसिया (Euthanasia) का विकल्प भी दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां:
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि हर महीने हजारों डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं और हर साल रेबीज से 20,000 से ज्यादा मौतें हो रही हैं। कोर्ट ने राज्य सरकारों को भी चेतावनी दी है कि डॉग बाइट मामलों में लापरवाही बरतने पर भारी मुआवजा देना पड़ सकता है।
प्रतिक्रियाएं:
- पीड़ित परिवारों ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया।
- पशु अधिकार कार्यकर्ताओं में निराशा है। वे इसे जानवरों के प्रति क्रूरता बताते हुए और बेहतर स्टेरिलाइजेशन कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं।
यह फैसला पूरे देश पर लागू होगा। दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में अब स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में तुरंत कार्रवाई शुरू करनी होगी।
