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    Home»Crime»आज से नए क्रिमिनल कानूनों को जानिए : इलेक्ट्रानिक डिजिटल रिकार्ड माने जाएंगे सबूत | अब मर्डर करने पर धारा 302 नहीं 101 लगेगी
    Crime

    आज से नए क्रिमिनल कानूनों को जानिए : इलेक्ट्रानिक डिजिटल रिकार्ड माने जाएंगे सबूत | अब मर्डर करने पर धारा 302 नहीं 101 लगेगी

    News Box BharatBy News Box BharatJuly 1, 20245 Mins Read
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    रांची। आज से यानी 1 जुलाई 2024 से 1860 में बनी आईपीसी की जगह भारतीय न्याय संहिता, 1898 में बनी सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व 1872 के इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम जाना जाएगा। तीनों नए कानूनों के लागू होने के बाद कई सारे नियम-कायदे बदल जाएंगे। नए कानून लागू होने पर आम आदमी, पुलिस, वकील व अदालतों के कामकाज में काफी बदलाव होगा। एक जुलाई से देश में आईपीसी, सीआरपीसी और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनिमय लागू हो रहे हैं। 1 जुलाई 2024 से लागू हो रहे आपराधिक प्रक्रिया तय करने वाले तीन नए कानूनों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए एफआइआर से लेकर फैसले तक को समय सीमा में बांधा गया है। अब मर्डर करने पर धारा 302 नहीं, 101 लगेगी। घोखाधड़ी में धारा 420 अब 318 हो गई है। रेप की धारा 375 नहीं, अब 63 हो गई है। शादीशुदा महिला को फुसलाना अब अपराध नहीं है। जबरन अप्राकृतिक यौन संबंध अब अपराध की कैटेगरी में नहीं आएगा। शिकायत मिलने पर एफआइआर दर्ज करने, जांच पूरी करने, अदालत के संज्ञान लेने, दस्तावेज दाखिल करने और ट्रायल पूरा होने के बाद फैसला सुनाने तक की समय सीमा तय है। साथ ही आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल और इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों को कानून का हिस्सा बनाने से मुकदमों के जल्दी निपटारे का रास्ता आसान हुआ है। शिकायत, सम्मन और गवाही की प्रक्रिया में इलेक्ट्रानिक माध्यमों के इस्तेमाल से न्याय की रफ्तार तेज होगी।

    3 दिन के अंदर एफआइआर दर्ज करनी होगी

    नए कानून में तय समय सीमा में एफआइआर दर्ज करना और उसे अदालत तक पहुंचाना सुनिश्चित किया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में व्यवस्था है कि शिकायत मिलने पर 3 दिन के अंदर एफआइआर दर्ज करनी होगी। तीन से सात साल की सजा के केस में 14 दिन में प्रारंभिक जांच पूरी करके एफआइआर दर्ज की जाएगी। 24 घंटे में तलाशी रिपोर्ट के बाद उसे न्यायालय के सामने रख दिया जाएगा।

    आरोपपत्र की भी टाइम लाइन तय

    दुष्कर्म के मामले में 7 दिन के भीतर पीड़िता की चिकित्सा रिपोर्ट पुलिस थाने और कोर्ट भेजी जाएगी। अभी तक लागू सीआरपीसी में इसकी कोई समय सीमा तय नहीं थी। नया कानून आने के बाद समय में पहली कटौती यहीं होगी। नए कानून में आरोपपत्र की भी टाइम लाइन तय है। आरोपपत्र दाखिल करने के लिए पहले की तरह 60 और 90 दिन का समय तो है लेकिन 90 दिन के बाद जांच जारी रखने के लिए कोर्ट से इजाजत लेनी होगी और जांच को 180 दिन से ज्यादा लंबित नहीं रखा जा सकता। 180 दिन में आरोपपत्र दाखिल करना होगा। पुलिस के लिए टाइमलाइन तय करने के साथ ही अदालत के लिए भी समय सीमा तय की गई है। मजिस्ट्रेट 14 दिन के भीतर केस का संज्ञान लेंगे। केस ज्यादा से ज्यादा 120 दिनों में ट्रायल पर आ जाए इसके लिए कई काम किए गए हैं। प्ली बार्गेनिंग का भी समय तय है। प्ली बार्गेनिंग पर नया कानून कहता है कि अगर आरोप तय होने के 30 दिन के भीतर आरोपी गुनाह स्वीकार कर लेगा तो सजा कम होगी।

    ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत को 30 दिन में फैसला सुनाना होगा

    अभी सीआरपीसीमें प्ली बार्गेनिंग के लिए कोई समय सीमा तय नहीं थी। नये कानून में केस में दस्तावेजों की प्रक्रिया भी 30 दिन में पूरी करने की बात है। फैसला देने की भी समय सीमा तय है। ट्रायल पूरा होने के बाद अदालत को 30 दिन में फैसला सुनाना होगा।लिखित कारण दर्ज करने पर फैसले की अवधि 45 दिन तक हो सकती है लेकिन इससे ज्यादा नहीं। नये कानून में दया याचिका के लिए भी समय सीमा तय है। सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के 30 दिन के भीतर दया याचिका दाखिल करनी होगी।

    जानें नये कानून में

    – राज्य को एकतरफा केस वापस लेने का अधिकार नहीं। पीड़ित का पक्ष सुना जाएगा

    – तकनीक के इस्तेमाल पर जोर, एफआइआर, केस डायरी, चार्जशीट, जजमेंट सभी होंगे डिजिटल

    – तलाशी और जब्ती में आडियो वीडियो रिकार्डिंग अनिवार्य

    – पहली बार आतंकवादको परिभाषित किया गया

    – राजद्रोह की जगह देशद्रोह बना अपराध

    – मॉब लिंचिंग के मामले में आजीवन कारावास या मौत की सजा

    – पीडि़त कहीं भी दर्ज करा सकेंगे एफआइआर, जांच की प्रगति रिपोर्ट भी मिलेगी

    – गवाहों के लिए ऑडियो वीडियो से बयान रिकार्ड कराने का विकल्प

    – 7 साल या उससे अधिक सजा के अपराध में फारेंसिक विशेषज्ञ द्वारा सबूत जुटाना अनिवार्य

    – छोटे मोटे अपराधों में जल्द निपटारे के लिए समरी ट्रायल का प्रविधान

    – पहली बार के अपराधी के ट्रायल के दौरान एक तिहाई सजा काटने पर मिलेगी जमानत

    – भगोड़े अपराधियों की संपत्ति होगी जब्त

    – इलेक्ट्रानिक डिजिटल रिकार्ड माने जाएंगे साक्ष्य

    – भगोड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी चलेगा मुकदमा

    कौन सा कानून लेगा किसकी जगह

    – इंडियन पैनल कोड (आइपीसी)1860 की जगह लागू हो रहा है – भारतीय न्याय संहिता 2023

    – क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) 1973 की जगह लागू हो रहा है – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023

    – इंडियन एवीडेंस एक्ट 1872 की जगह लागू हो रहा है – भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023

    511 से 383 धाराएं

    भारतीय दंड संहिता में 511 धाराएं थीं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता में धाराएं 358 रह गई हैं। संशोधन के जरिए इसमें 20 नए अपराध शामिल किए हैं, तो 33 अपराधों में सजा अवधि बढ़ाई है। 83 अपराधों में जुर्माने की रकम भी बढ़ाई है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान है। छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।

    Crimnals Law Law and Order
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