
भारत की अर्थव्यवस्था और कारोबार से जुड़ी कई अहम खबरें शनिवार को सामने आईं। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 716.91 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने सफाई दी है। इसके अलावा भारत और ब्रिटेन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा समेत रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है।
विदेशी मुद्रा भंडार में 9.90 अरब डॉलर का इजाफा
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 14 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 9.90 अरब डॉलर बढ़कर 716.91 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे एक सप्ताह पहले यानी 7 अगस्त को भंडार में 14.136 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी और यह 707.002 अरब डॉलर पर था।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद पश्चिम एशिया में तनाव के बीच रुपये पर दबाव बढ़ा और रिजर्व बैंक को मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे भंडार में कुछ समय तक गिरावट देखने को मिली।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भी बढ़ीं
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 7.225 अरब डॉलर बढ़कर 581.851 अरब डॉलर हो गईं। ये परिसंपत्तियां भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
चीनी की कीमत क्यों बढ़ रही है?
देश में चीनी के खुदरा भाव में पिछले एक महीने में तेज बढ़ोतरी हुई है। सरकार के अनुसार 20 जुलाई को चीनी की कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई।
सरकार ने कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण बताए हैं। इनमें घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग में इजाफा, मौसम की वजह से फसल को नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी और जमाखोरी शामिल हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल मौजूदा कीमत वृद्धि का मुख्य कारण नहीं है।
उत्पादन घटने का भी असर
सरकार के अनुमान के अनुसार घरेलू चीनी उत्पादन घटकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह सकता है। उत्पादन में कमी के बीच बाजार में उपलब्धता और मांग के संतुलन पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की है। साथ ही 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है।
भारत-ब्रिटेन रक्षा सहयोग भी बढ़ेगा
कारोबार और अर्थव्यवस्था के अलावा भारत-ब्रिटेन संबंधों से जुड़ा महत्वपूर्ण अपडेट भी सामने आया है। नई दिल्ली में हुई 25वीं भारत-यूके रक्षा परामर्श समूह की बैठक में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक में संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में रिसर्च और डेवलपमेंट सहयोग की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने इंडिया-यूके विजन 2035 और दस वर्षीय रक्षा औद्योगिक रोडमैप के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
हिंद-प्रशांत पर विशेष फोकस
भारत और ब्रिटेन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ने का असर भविष्य में सैन्य प्रशिक्षण, तकनीक और रक्षा उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
आम लोगों और बाजार के लिए क्या मायने?
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के बाहरी मोर्चे के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। दूसरी ओर चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर सकती है, खासकर त्योहारों के मौसम में जब चीनी की मांग बढ़ती है।
सरकार की ओर से शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक सीमा जैसे कदमों का उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। आने वाले दिनों में उत्पादन, आयात और मांग के आंकड़े यह तय करेंगे कि चीनी की कीमतों में तेजी कितनी जल्दी नियंत्रित होती है।
