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    Home»Crime»IAS दुर्गा शक्ति नागपाल पर जज को फोन कर प्रभावित करने का आरोप, हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
    Crime

    IAS दुर्गा शक्ति नागपाल पर जज को फोन कर प्रभावित करने का आरोप, हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

    News Box BharatBy News Box BharatAugust 24, 20263 Mins Read
    दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े भूमि विवाद मामले में हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारी को कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोप पर गंभीर टिप्पणी की।
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    उत्तर प्रदेश में चर्चित IAS अधिकारी और गोंडा की मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने एक लंबित भूमि विवाद की सुनवाई कर रही सिविल जज को कथित तौर पर फोन कर प्रभावित करने के मामले को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया है। कोर्ट ने मामले को आपराधिक अवमानना के लिए संदर्भित करने की बात कही है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह विवाद गोंडा की एक नजूल जमीन से जुड़ा है। ज्योति विद्या मंदिर की ओर से नगर पालिका परिषद गोंडा के खिलाफ दायर मुकदमा 1997 से लंबित है। मामला अभी साक्ष्य के चरण में था और अदालत की ओर से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी था।

    स्कूल की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकारी अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल कर अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी आधार पर मुकदमे को देवीपाटन मंडल से बाहर ट्रांसफर करने की मांग हाईकोर्ट में की गई थी।

    जज ने फोन कॉल को लेकर क्या बताया?

    मामले की सुनवाई कर रहीं गोंडा की सिविल जज सीनियर डिवीजन शबीना खान ने बताया कि 15 जुलाई को उनकी मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल से कथित तौर पर टेलीफोन पर बातचीत हुई थी।

    जज के अनुसार, बातचीत में उनकी छुट्टी के साथ-साथ उनकी अदालत में लंबित एक मामले का भी संदर्भ आया। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त को जिला जज गोंडा से अपने कोर्ट से इस मुकदमे को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। बाद में मुकदमा गोंडा की ही दूसरी सक्षम अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया।

    हाईकोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?

    हाईकोर्ट ने कहा कि मामले को समाप्त करने से पहले फोन कॉल से जुड़े आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के मुताबिक, जज द्वारा बताए गए बातचीत के लहजे और भाषा से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें पीठासीन अधिकारी के रूप में प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि मंडलायुक्त ने फोन किए जाने से इनकार नहीं किया है। हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि जब कोई मुकदमा अदालत में लंबित हो, तो उससे जुड़े मामले में कोई पक्षकार सीधे फोन करके अदालत से संपर्क कैसे कर सकता है।

    आपराधिक अवमानना का मामला

    हाईकोर्ट ने इस घटना को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय प्रशासन से जुड़ा गंभीर विषय माना। कोर्ट ने कहा कि मामले में आपराधिक अवमानना के तहत विचार किए जाने की जरूरत है।

    अदालत ने निर्देश दिया कि चीफ जस्टिस या वरिष्ठ जज से आवश्यक दिशा-निर्देश लेने के बाद मामले को उचित अदालत के समक्ष रखा जाए।

    हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की स्वतंत्रता पर दिया जोर

    अदालत ने स्पष्ट किया कि अधीनस्थ न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों को किसी भी तरह के भय, अपमान या दबाव से मुक्त होकर न्यायिक जिम्मेदारियां निभाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।

    कोर्ट के मुताबिक, किसी व्यक्ति, पक्षकार या अधिवक्ता की ओर से अदालत पर दबाव बनाने का प्रयास न्याय प्रक्रिया में बाधा डाल सकता है।

    मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में

    फिलहाल हाईकोर्ट की टिप्पणियां और आपराधिक अवमानना के लिए संदर्भित करने की प्रक्रिया इस मामले को आगे महत्वपूर्ण बना सकती है। वहीं, फोन कॉल के जरिए जज को प्रभावित करने का आरोप अदालत में विचाराधीन मामला है, इसलिए इसे अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    Allahabad High Court Durga Shakti Nagpal IAS Officer
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