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    वन अधिकार अधिनियम : मोदी सरकार आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही

    News Box BharatBy News Box BharatApril 2, 20254 Mins Read
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    कांग्रेस ने वक्फ बिल का विरोध किया

    रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से कांग्रेस भवन, रांची में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि 2006 में कांग्रेस ने आदिवासियों को जल जंगल और जमीन पर अधिकार सुनिश्चित करने के लिए वन अधिकार अधिनियम लागू किया था। लेकिन केन्द्र सरकार की निष्क्रियता के चलते इस कानून के तहत किए गए लाखों वास्तविक दावे बिना किसी समीक्षा के मानमाने ढंग से खारिज कर दिए गए। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी लोगों को उनकी जमीन से बेदखल करने का आदेश दिया, जिनके दावे खारिज हो चुके थे। लेकिन भारी विरोध के बाद कोर्ट ने रोक लगाई और दावों की गहन समीक्षा का आदेश दिया था। अब कल पुनः इस मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में है और मोदी सरकार लापता है। 2019 में भी इस कानून की बचाव नहीं कर सकी थी और आज भी आदिवासी अधिकारों के पक्ष में खड़ी नहीं दिख रही है। आज चिंताजनक परिस्थिति यह है कि दावों की समीक्षा का गंभीर प्रयास आज तक नहीं हुआ, जिससे उच्चतम न्यायालय में फैसला इस कानून के खिलाफ आ सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वक्फ संशोधन विधेयक के विभिन्न प्रावधानों के विरोध में है। वक्फ बोर्ड परिषद में दो गैर मुस्लिम को शामिल करना, वक्फ ट्रिव्यूनल के स्थान पर सरकारी अधिकारी को विवाद निपटारे का अधिकार देना, वक्फ न्यायाधिकरणों के आदेशों को उच्च न्यायालय में अपील करने की अनुमति देने से वक्फ से संबंधित विवाद लंबे समय तक चलेंगे और न्याय की आश में लोग भटकते रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश की सामाजिक समरसता को विभक्त करने के लिए भाजपा अपने एजेंडे के तहत इस संशोधन विधेयक को लायी है। भाजपा के कुत्सित विचारों का विरोध संवैधानिक ढांचे के अनुरूप कांग्रेस करती रहेगी।

    बीजेपी की नीयत साफ होनी चाहिए

    पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने वक्फ बिल को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीति चाहे जो भी बनाई जाए, लेकिन उसकी नीयत साफ होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस वक्फ बिल के जरिए समाज में झगड़ा और फसाद पैदा करना चाहती है। साथ ही बेरोजगारी और महंगाई जैसे गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि 2013 में यूपीए सरकार ने जो कानून लाया था, उसे प्रभावी तरीके से लागू करने में विफलता के लिए वर्तमान सरकार जिम्मेदार है। क्योंकि 2014 के बाद से केंद्र में उनकी ही सरकार है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य कई संगठन इस बिल का विरोध कर रहे हैं, तो सरकार ने उनसे संवाद क्यों नहीं किया।

    आदिवासियों की जमीन हड़पने की साजिश

    राजेश ने कहा कि सरकार पर अल्पसंख्यकों और आदिवासियों की जमीन हड़पने की साजिश का आरोप लगाते हुए कहा कि वनाधिकार पट्टों को लेकर भी केंद्र सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आदिवासियों को वन पट्टा देने की प्रक्रिया फ़ॉरेस्ट राइट एक्ट 2006 का पक्ष जानबूझकर सर्वाेच्च न्यायालय में सही तरीक़े से नहीं रखी जा रही है। ताकि उनकी जमीनें पूंजीपतियों को सौंपी जा सकें। ठाकुर ने झारखंड सरकार द्वारा अबुआ वीर अबुआ दसोम के माध्यम से वन पट्टा देने के प्रयासों की सराहना की और कहा कि संशोधन का विरोध नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संशोधन राज्य और देश के हित में हो। उन्होंने सरकार पर समाज में नफरत और दहशत फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह के कानून केवल जनता को गुमराह करने के लिए लाए जा रहे हैं।

    एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा

    सुबोधकांत सहाय ने वक्फ बिल को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इसे देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को तोड़ने की साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल भारतीय जनता पार्टी के 2014 के बाद से चल रहे एजेंडे का हिस्सा है, जो समाज को विभाजित करने की मंशा से प्रेरित है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में धर्म के आधार पर भेदभाव करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि यह समाज में अविश्वास और असंतोष को बढ़ावा देगा। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शाहजादा अनवर ने कहा कि यह बिल केवल एक समुदाय को निशाना बनाने और समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि भाजपा बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को खत्म करना चाहती है। वह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रही है। संवाददाता सम्मेलन में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजिनी, सोनाल शांति, प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस चेयरमैन मंजूर अंसारी, आदिवासी कांग्रेस चेयरमैन जोसाई मार्डी उपस्थित थे।

    adivasi Congress Party Forest Rights Act Forest Rights Act 2006
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