
बांग्लादेश इन दिनों गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। प्राकृतिक गैस की कमी, LNG आपूर्ति में बाधा और बिजली उत्पादन पर बढ़ते दबाव ने हालात ऐसे कर दिए हैं कि कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती हो रही है। संकट से निपटने के लिए सरकार ने बाजारों, दुकानों और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया है। वहीं, बांग्लादेश ने अतिरिक्त डीजल के लिए भारत से भी मदद मांगी है।
आखिर क्यों गहराया बांग्लादेश का ऊर्जा संकट?
बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था में प्राकृतिक गैस की महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन हाल के दिनों में गैस की उपलब्धता में तेज गिरावट आई है। अगस्त की शुरुआत में रिपोर्टों के मुताबिक पाइपलाइन गैस सप्लाई में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के बाद बड़ी संख्या में बिजली संयंत्र ईंधन की कमी से प्रभावित हुए थे।
इसके साथ ही LNG आपूर्ति से जुड़ी समस्या ने संकट को और बढ़ा दिया। महेशखाली क्षेत्र में LNG टर्मिनल से जुड़ी दिक्कतों के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई और इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा। बाद में FSRU संचालन में कुछ सुधार हुआ, लेकिन उद्योगों और बिजली क्षेत्र पर दबाव बना रहा।
कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती
गैस की कमी का सबसे बड़ा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है। कई इलाकों में लंबे समय तक लोड शेडिंग की खबरें सामने आई हैं और कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती कई घंटे तक पहुंच गई। इससे घरों के साथ-साथ बाजार, कारोबार और उद्योग भी प्रभावित हुए हैं।
बिजली बचाने के लिए सरकार ने शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने का फैसला किया है। इससे पहले व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग समय सीमा लागू थी, लेकिन बिगड़ते संकट के बीच इसे और सख्त किया गया।
भारत से मांगा अतिरिक्त डीजल
ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की है। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, दोनों देशों के बीच पहले से डीजल आपूर्ति की पाइपलाइन मौजूद है और इसी माध्यम से अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने का अनुरोध भारत से किया गया है।
भारत से मदद मांगना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश बिजली उत्पादन में गैस की कमी को पूरा करने के लिए तरल ईंधन आधारित संयंत्रों पर भी दबाव बढ़ा सकता है। हालांकि भारत की ओर से अनुरोध पर प्रक्रिया जारी होने की बात सामने आई है।
संकट का कनेक्शन वैश्विक ऊर्जा बाजार से भी
बांग्लादेश की समस्या केवल घरेलू गैस उत्पादन तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया के संकट ने LNG और अन्य ईंधनों की आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। इससे आयात पर निर्भर देशों के लिए ऊर्जा खरीदना और महंगा तथा मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि बांग्लादेश में घरेलू गैस की कमी के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों का असर भी दिखाई दे रहा है।
उद्योगों पर भी बढ़ा दबाव
ऊर्जा संकट का असर बांग्लादेश के उद्योगों तक पहुंच चुका है। गैस की कम उपलब्धता और कम दबाव के कारण कई फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। कुछ उद्योगों को संचालन रोकने तक की स्थिति का सामना करना पड़ा है।
गैस की आपूर्ति में सुधार के बावजूद बिजली संयंत्रों को प्राथमिकता दिए जाने से कई उद्योगों को अभी भी पर्याप्त गैस नहीं मिल रही है। इससे उत्पादन, लागत और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है।
क्या बांग्लादेश ने ऊर्जा नीति में गलती की?
मौजूदा संकट ने बांग्लादेश की ऊर्जा व्यवस्था की कमजोरियों को भी सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश को लंबे समय से ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा में ज्यादा निवेश करने की जरूरत थी।
2026 में बांग्लादेश के बिजली मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत बताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों में ज्यादा निवेश से देश की जीवाश्म ईंधन और आयात पर निर्भरता कम की जा सकती थी।
आम लोगों से लेकर कारोबार तक असर
इस संकट का असर सिर्फ बिजली कटौती तक सीमित नहीं है। बाजार जल्दी बंद होने से दुकानदारों के काम के घंटे घट रहे हैं, जबकि बिजली और गैस की कमी से उद्योगों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। घरों में लंबे पावर कट रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना रहे हैं।
अगर ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने में ज्यादा समय लगता है तो इसका असर महंगाई, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
बांग्लादेश के सामने तत्काल चुनौती बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त गैस और वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था करना है। भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग इसी तत्काल जरूरत का हिस्सा है।
लेकिन लंबे समय के समाधान के लिए बांग्लादेश को घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने, LNG आपूर्ति के जोखिम कम करने, बिजली ग्रिड को मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की जरूरत होगी।
बांग्लादेश के संकट की बड़ी वजहें
- प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में कमी
- LNG आपूर्ति में व्यवधान
- बिजली संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिलना
- वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता
- आयातित ईंधन पर निर्भरता
- नवीकरणीय ऊर्जा की कम हिस्सेदारी
- कमजोर गैस और बिजली आपूर्ति व्यवस्था
बांग्लादेश का मौजूदा ऊर्जा संकट किसी एक घटना का नतीजा नहीं है। घरेलू गैस की कमी और LNG आपूर्ति में बाधा ने तत्काल संकट पैदा किया, जबकि वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता ने इसे और गंभीर बना दिया। इसका असर अब बिजली कटौती से आगे बढ़कर बाजारों के जल्दी बंद होने और उद्योगों के उत्पादन तक पहुंच चुका है।
भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग बताती है कि संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश को फिलहाल पड़ोसी देशों की मदद और वैकल्पिक ईंधन दोनों की जरूरत पड़ रही है। लेकिन स्थायी समाधान के लिए देश को अपनी ऊर्जा नीति में लंबे समय के बदलाव करने होंगे।
