
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार अपने फैसले की वजह को लेकर विस्तार से बात की है। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कभी प्रतिष्ठा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह देश और विद्यार्थियों के प्रति जिम्मेदारी थी। छात्र आंदोलन के बीच 25 जुलाई 2026 को प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा था।
छात्र आंदोलन के बीच लिया था इस्तीफे का फैसला
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया था, जब छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। NEET-UG में कथित अनियमितताओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच नाराजगी थी।
अपने इस्तीफे के समय प्रधान ने कहा था कि पिछले दिनों विद्यार्थियों के विरोध से पैदा हुई स्थिति से वह व्यथित थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका फैसला व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ा नहीं है, बल्कि वह चाहते हैं कि छात्रों का भविष्य कानूनी और राजनीतिक विवादों में न फंसे।
‘मंत्री पद मेरे लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं’
इस्तीफे के बाद पहली सार्वजनिक स्पीच में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक जीवन और मंत्री पद को लेकर अपना नजरिया सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनके लिए मंत्री पद प्रतिष्ठा हासिल करने का माध्यम नहीं था। उनके मुताबिक, पद से ज्यादा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और देश की सेवा है।
प्रधान ने अपने संबोधन में युवाओं, खासकर Gen Z की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने इस पीढ़ी को ऐसी ताकत बताया जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक युवा देश के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
NEET विवाद पर भी रखी थी अपनी बात
इस्तीफा देते समय धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि परीक्षा में अनियमितताओं के बाद जांच CBI को सौंपी गई और परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
उन्होंने बताया था कि सरकार ने अगले वर्ष से NEET-UG को कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित करने का निर्णय भी लिया। उनके अनुसार, 21 जून 2026 को दोबारा आयोजित परीक्षा को केंद्र, राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के सहयोग से पूरा कराया गया था।
छात्रों के भविष्य को बताया सबसे महत्वपूर्ण
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और स्थिति से पीछे नहीं हटे। उन्होंने 16 जुलाई को घोषित NEET-UG परिणामों का भी जिक्र करते हुए कहा था कि इसमें वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले कई विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की।
उनके इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन के बीच इसे एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा गया। अब इस्तीफे के बाद दिए गए उनके बयान ने इस फैसले को लेकर चर्चा को एक नया राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ दे दिया है।
बड़ी बातें
- धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था।
- उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा था।
- NEET-UG विवाद और छात्र आंदोलन के बीच उनका इस्तीफा हुआ।
- प्रधान ने कहा कि मंत्री पद उनके लिए प्रतिष्ठा नहीं, जिम्मेदारी था।
- इस्तीफे के बाद उन्होंने Gen Z की भूमिका और युवा शक्ति पर भी बात की।
अब आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। खासकर NEET-UG जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा बहाल करना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहेगा।
वहीं, प्रधान के ताजा बयान से साफ है कि वह अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत राजनीतिक हार के बजाय विद्यार्थियों और सार्वजनिक जिम्मेदारी के संदर्भ में देखते हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति में अपने फैसले की पृष्ठभूमि पर बात की। उन्होंने मंत्री पद को प्रतिष्ठा नहीं बल्कि जिम्मेदारी बताया और युवाओं, खासकर Gen Z को देश की महत्वपूर्ण ताकत बताया।
