
NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) के बैनर तले निकाला गया ‘चलो संसद’ मार्च सोमवार को राजधानी दिल्ली में चर्चा का केंद्र बना रहा। जंतर-मंतर से शुरू हुए इस मार्च में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि अभिभावक, डिलीवरी पार्टनर, शिक्षक, प्रोफेशनल्स और आम नागरिक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए रोक दिया। इसके बाद कई स्थानों पर धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं। सोशल मीडिया पर प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो भी तेजी से वायरल हुए।

CJP आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
CJP पिछले कई सप्ताह से जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहा है। संगठन का आरोप है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है।
प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग
- पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच
- परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार
- प्रभावित छात्रों और परिवारों को सहायता
- सभी छात्रों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना
CJP का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए है।
आंदोलन में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हुए।
छात्र और अभिभावक
दिल्ली की एक महिला अपने पति और तीन बच्चों के साथ प्रदर्शन में पहुंचीं। उनका कहना था कि सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चों के बीच बढ़ती असमानता खत्म होनी चाहिए और हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए।
डिलीवरी पार्टनर और युवा
उत्तर प्रदेश के बरेली से पहुंचे कुछ युवा, जो वर्तमान में डिलीवरी का काम करते हैं, भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों का असर सीधे युवाओं के भविष्य पर पड़ता है और इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
प्रोफेशनल्स और शिक्षक
जयपुर से आए एक आर्किटेक्ट ने कहा कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं मुंबई से पहुंचे एक शिक्षक और कलाकार ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन की जानकारी मिली और वे छात्रों के समर्थन में शामिल हुए।
संसद मार्च के दौरान क्या हुआ?
मार्च शुरू होने के कुछ समय बाद प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे। रास्ते में भारी पुलिस बल पहले से तैनात था।
घटनाक्रम के दौरान:
- कई जगह बैरिकेड लगाए गए।
- प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई।
- कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं।
- कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
- कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
- सोशल मीडिया पर घायल छात्रों और प्रदर्शनकारियों के कई वीडियो वायरल हुए।
- सुरक्षा कारणों से कुछ इलाकों में यातायात और सार्वजनिक परिवहन पर भी असर देखा गया।
CJP का आरोप
CJP ने दावा किया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि घटनास्थल के पास संदिग्ध परिस्थितियों में एक ट्रक खड़ा था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
सरकार और पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।
CJP का ‘चलो संसद’ मार्च केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए अभिभावकों, युवाओं, प्रोफेशनल्स और आम नागरिकों ने भी हिस्सा लिया। एक ओर प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला दे रहा है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना रह सकता है।
