
नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर से जुड़ी टिप्पणी के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि शिकायत और ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी समन को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मामले में आवश्यक कानूनी मंजूरी मौजूद होने का कोई खुलासा नहीं किया गया था। इसी आधार पर अदालत ने आपराधिक कार्यवाही को आगे जारी रखने से इनकार करते हुए शिकायत और मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी की वर्ष 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है। आरोप था कि उन्होंने अपने बयान में सावरकर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।
इसके बाद अधिवक्ता नृपेंद्र पांडेय की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दाखिल की गई थी। मामले में उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने दिसंबर 2023 में राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
14 अगस्त 2026 को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि आवश्यक सरकारी मंजूरी दिए जाने का कोई उल्लेख संबंधित हलफनामे में नहीं था।
अदालत ने इसी कमी को आधार बनाते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्यवाही को कायम नहीं रखा जा सकता। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत के साथ-साथ मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को भी रद्द कर दिया।
राहुल गांधी के लिए क्यों अहम है फैसला?
इस आदेश से राहुल गांधी को इस विशेष मानहानि मामले में तत्काल कानूनी राहत मिली है। हालांकि यह फैसला उनके द्वारा सावरकर पर की गई टिप्पणियों की सत्यता या राजनीतिक बहस पर कोई फैसला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश मामले में आवश्यक कानूनी मंजूरी की कमी से जुड़ा है।
मामले की प्रमुख बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि शिकायत रद्द की।
- राहुल गांधी के खिलाफ जारी समन भी निरस्त कर दिया गया।
- मामला सावरकर पर राहुल गांधी की 2022 की टिप्पणी से जुड़ा था।
- अदालत ने आवश्यक सरकारी मंजूरी के अभाव को महत्वपूर्ण माना।
- फैसला जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनाया।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद इस विशेष शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई है। मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राहुल गांधी और सावरकर को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच लंबे समय से वैचारिक और राजनीतिक मतभेद रहे हैं।
नोट: यह फैसला केवल संबंधित आपराधिक शिकायत और समन की कानूनी वैधता पर है। इसे राहुल गांधी की सावरकर संबंधी टिप्पणी पर अदालत की ओर से कोई अंतिम राय नहीं माना जाना चाहिए।
