
रांची: JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में CID की जांच और तेज
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद समेत राज्य के कई जिलों में 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, OMR शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
अब सिर्फ JPSC नहीं, कई राष्ट्रीय परीक्षाएं भी जांच के दायरे में
CID की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी अभय तिवारी कई प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुआ था। इसलिए अब एजेंसी यह सत्यापित कर रही है कि इन परीक्षाओं में उसकी सफलता वैध थी या नहीं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जिन परीक्षाओं की जानकारी मांगी गई है, उनमें शामिल हैं:
- 2013 की भारतीय नौसेना SSR भर्ती परीक्षा
- 2014 की BARC सहायक भर्ती परीक्षा
- IRB कांस्टेबल परीक्षा
- 2014 की NCL भर्ती परीक्षा
- 2018 की झारखंड पुलिस अवर निरीक्षक (SI) परीक्षा
- CRPF हेड कांस्टेबल परीक्षा
- JPSC की PGT शिक्षक परीक्षा
- JPSC ACF, FRO और FSO परीक्षा
- JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा
CID ने संबंधित भर्ती एजेंसियों से अभ्यर्थी के आवेदन पत्र, मूल्यांकन रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया और अन्य अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है ताकि पूरी जांच की जा सके।
पहले क्या कार्रवाई हुई थी?
यह मामला जुलाई में दर्ज CID थाना कांड संख्या 16/2026 से जुड़ा है। अब तक जांच में:
- JPSC के पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता गिरफ्तार हुईं।
- TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) के निदेशक और कई कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया।
- मुख्य आरोपी अभय तिवारी सहित कई लोगों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई।
- पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवास और JPSC कार्यालय में भी तलाशी ली गई।
आज की छापेमारी में क्या मिला?
CID के अनुसार कार्रवाई के दौरान जब्त सामग्री में शामिल हैं—
- लैपटॉप
- मोबाइल फोन
- बैंक पासबुक
- चेकबुक
- OMR शीट की कार्बन कॉपी
- एडमिट कार्ड
- अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य
इन सभी की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
छात्रों का आंदोलन भी जारी
JPSC और JSSC परीक्षा अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। छात्र संगठन लगातार CBI जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि राज्य की CID और SIT निष्पक्ष जांच कर रही हैं।
आगे क्या होगा?
CID अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि:
- क्या आरोपी ने विभिन्न परीक्षाओं में किसी संगठित नेटवर्क की मदद ली?
- क्या अन्य अभ्यर्थियों को भी इसी तरीके से लाभ पहुंचाया गया?
- क्या भर्ती प्रक्रिया में और अधिकारी या निजी एजेंसियां शामिल थीं?
यदि विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त रिकॉर्ड में अनियमितता मिलती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
